रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
MP : मध्य प्रदेश में जल संकट से निपटने और पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए एक विराट जन-आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद ने आगामी गंगा दशहरा (25 मई 2026) के पावन अवसर पर प्रदेश के 10,000 गांवों में ‘जल गंगा कलश यात्रा’ निकालने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य ध्येय जल स्रोतों के प्रति सम्मान प्रकट करना और आम जनमानस को जल संवर्धन की मुख्यधारा से जोड़ना है।


MP प्राचीन जल स्रोतों का कायाकल्प और पूजन
इस अभियान की शुरुआत केवल यात्रा से नहीं, बल्कि कर्म से होगी। कलश यात्रा निकालने से पूर्व गांवों की प्राचीन जल संरचनाओं, जैसे—सदियों पुरानी बावलियों, कुओं, तालाबों और सरोवरों की व्यापक स्तर पर साफ-सफाई की जाएगी। स्वच्छता अभियान के पश्चात इन जल स्रोतों का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। पूजन के उपरांत इन्हीं पवित्र स्रोतों से जल भरकर कलश यात्राएं निकाली जाएंगी, जो पूरे गांव में जल संरक्षण का संदेश प्रसारित करेंगी।
MP युवाओं में नेतृत्व और ‘नवांकुर सखियों’ की भूमिका
भोपाल के वैशाली नगर में आयोजित ‘सी.एम. सोशल इंटर्न प्रशिक्षण कार्यशाला’ के समापन पर इस योजना को अंतिम रूप दिया गया। परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर के अनुसार, इस अभियान का एक बड़ा उद्देश्य युवाओं के भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करना है। मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम (CMCLDP) के तहत प्रशिक्षित युवा और परिषद का ‘नवांकुर सखी’ नेटवर्क इस यात्रा की रीढ़ बनेगा। यह नेटवर्क न केवल ग्रामीणों को एकजुट करेगा, बल्कि समाज के उत्थान के लिए युवाओं को एक सशक्त मंच भी प्रदान करेगा।
MP जन-आंदोलन बनेगा जल संरक्षण का संकल्प
प्रशासन और परिषद का लक्ष्य इस अभियान को केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे एक ‘जन-आंदोलन’ का स्वरूप देना है। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से जल प्रबंधन की पारंपरिक पद्धतियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। यह पहल प्रदेश में गिरते भू-जल स्तर को रोकने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। परिषद को विश्वास है कि यह सामूहिक संकल्प स्थायी जल प्रबंधन के प्रति लोगों की सोच में बड़ा बदलाव लाएगा।
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