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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Singrauli : जिला मुख्यालय के गनियारी क्षेत्र से मुक्तिधाम की ओर जाने वाला मार्ग इन दिनों बेहद खतरनाक हो चुका है। नियमों को ताक पर रखकर निजी अस्पतालों और क्लीनिकों ने इस पवित्र मार्ग को ‘मेडिकल डंपिंग यार्ड’ में तब्दील कर दिया है। सड़क किनारे भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां, इस्तेमाल की गई सिरिंज, कांच की बोतलें और रसायनों के अवशेष खुले में पड़े देखे जा सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

Singrauli नियमों की खुली अवहेलना: सतना भेजने के बजाय सड़क पर कचरा

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार, सिंगरौली जिले का समस्त चिकित्सीय कचरा वैज्ञानिक निस्तारण के लिए सतना स्थित अधिकृत प्लांट भेजा जाना अनिवार्य है। इसके लिए निर्धारित शुल्क और परिवहन की व्यवस्था भी की गई है।

बावजूद इसके, कुछ लापरवाह अस्पताल संचालक परिवहन का खर्च बचाने और नियमों से बचने के लिए आधी रात के अंधेरे में कचरा गनियारी मुक्तिधाम मार्ग पर फेंक रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ किया जा रहा एक बड़ा खिलवाड़ है।

Singrauli बच्चों और बेजुबानों पर मंडराया जानलेवा संकट

सड़क पर बिखरा यह संक्रमित कचरा न केवल इंसानों बल्कि मवेशियों के लिए भी काल बन गया है। इस कचरे के कारण निम्नलिखित खतरे उत्पन्न हो रहे हैं:

  • मवेशियों की मौत का डर: खुले में फेंकी गई दवाइयों को खाने से मवेशियों की जान जा सकती है।
  • संक्रमण का प्रसार: कचरे में मौजूद उपयोग की गई सुइयां (Needles) और सिरिंज से हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसे गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है।
  • बच्चों के लिए असुरक्षित: पास की बस्तियों के बच्चे अक्सर इस रास्ते पर खेलते हैं, जो अनजाने में इन विषैले अवशेषों के संपर्क में आ सकते हैं।

Singrauli CMHO की सख्त चेतावनी: रद्द होंगे लाइसेंस और दर्ज होगी FIR

मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंगरौली के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पुष्पराज सिंह ठाकुर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष जांच टीम गठित कर दी है जो कचरे के स्रोतों (जैसे दवाइयों के बैच नंबर और पर्चियों) की जांच करेगी।

डॉ. ठाकुर ने स्पष्ट किया:

“मेडिकल वेस्ट को खुले में फेंकना बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का गंभीर उल्लंघन है। जांच में दोषी पाए जाने वाले क्लीनिकों और नर्सिंग होम का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाएगा और उनके खिलाफ थाने में FIR दर्ज कराई जाएगी।”

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता से अब लापरवाह संचालकों में हड़कंप मच गया है।

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