Report: Yoganand Shrivastava, Edit: Ravindra Singh
Daboh : भिंड जिले की दबोह कृषि उपज मंडी इन दिनों भ्रष्टाचार का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कि मंडियों में पारदर्शिता बरती जाए और किसानों को कोई असुविधा न हो, दबोह मंडी प्रशासन शासन के आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है। यहाँ न तो किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं और न ही अनाज की बिक्री में कोई ईमानदारी बरती जा रही है।

Daboh अवैध दुकानों और फर्जी तुलाई का ‘सिंडिकेट’
मंडी गेट के ठीक बाहर 50 से अधिक ऐसी फुटकर दुकानें संचालित हो रही हैं, जिनके पास व्यापार का कोई वैध लाइसेंस नहीं है। इन दुकानों पर बड़े कांटे और तराजू रखे गए हैं, जहाँ किसानों को दलालों के माध्यम से अनाज तौलने के लिए मजबूर किया जाता है। यह पूरा खेल टैक्स चोरी को बढ़ावा देने के लिए रचा गया है। प्रतिदिन हजारों टन अनाज मंडी टैक्स चुकाए बिना इन अवैध रास्तों से बाहर भेजा जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुँच रही है।

Daboh भीषण गर्मी में ‘अन्नदाता’ की अनदेखी और प्रशासनिक मिलीभगत
तपती धूप और लू के थपेड़ों के बीच अपनी उपज बेचने पहुँचने वाले किसानों के लिए मंडी परिसर में कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं हैं। पीने के पानी से लेकर छाया तक की अव्यवस्था के कारण किसान बदहाल हैं। गंभीर आरोप यह है कि इन बिना लाइसेंस वाली दुकानों से मंडी के वरिष्ठ अधिकारियों को मोटा कमीशन पहुँचता है। इसी ‘महीने’ के चक्कर में जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर इन अवैध गतिविधियों पर आँखें मूँदे बैठे हैं, जबकि किसान कम कीमत पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं।

Daboh मंडी प्रभारी की संदिग्ध चुप्पी और संयुक्त संचालक से उम्मीदें
हैरानी की बात यह है कि जब इस मामले में मंडी प्रभारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे ‘जानकारी में न होना’ बताकर पल्ला झाड़ लिया। 50 से अधिक दुकानें, समथर मोड़ पर खुलेआम संचालित होने वाले अवैध कांटे (तेजराम राठौर, राजेंद्र गुप्ता, शिवकुमार गुप्ता जैसे दर्जनों नाम) प्रशासन को दिखाई नहीं दे रहे, जो अपने आप में एक बड़ा सवाल है। अब क्षेत्र के किसानों और आम जनता की निगाहें संयुक्त संचालक कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या वे इस भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे?
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