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रिपोर्टर: प्रेम कुमार श्रीवास्‍तव

Jamshedpur : लौहनगरी जमशेदपुर का बारीडीह क्षेत्र 1 जून 2026 को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रहा है। प्रतिष्ठित मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज (MTMC) अपना पहला दीक्षांत समारोह आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आयोजन न केवल इस युवा संस्थान के लिए बल्कि झारखंड और पूरे पूर्वी भारत की चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नए और सुनहरे अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। इस भव्य दीक्षांत समारोह में कॉलेज के पहले एमबीबीएस (MBBS) बैच के 133 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उनकी मेडिकल डिग्री सौंपी जाएगी, जिसके बाद ये युवा डॉक्टर देश की स्वास्थ्य सेवा में अपना योगदान देंगे।

Jamshedpur महामहिम राज्यपाल संतोष गंगवार होंगे मुख्य अतिथि

कॉलेज परिसर में होने वाले इस गरिमामयी समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे और युवा डॉक्टरों को दीक्षांत संदेश देंगे। उनके अलावा राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री इरफान अंसारी और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार विजय कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (MAHE) और टाटा स्टील के आला अधिकारियों समेत चिकित्सा जगत के कई नामचीन विशेषज्ञ और अभिभावक शामिल होंगे।

Jamshedpur ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ की एक अनूठी और सफल मिसाल

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में स्थापित हुए इस मेडिकल कॉलेज की नींव दो बड़े दिग्गजों—MAHE और टाटा स्टील की अनूठी साझेदारी पर टिकी है। इसे देश में निजी-निजी भागीदारी (PPP) का एक बेहद सफल और अनुकरणीय मॉडल माना जाता है। बहुत ही कम समय में इस संस्थान ने देश के चिकित्सा मानचित्र पर अपनी धाक जमाई है। वर्तमान में यहाँ एमबीबीएस के अलावा एलाइड हेल्थ साइंसेज और पीजी (स्नातकोत्तर) कोर्स भी संचालित हो रहे हैं, जिनमें 1,286 से अधिक छात्र अपने स्वर्णिम भविष्य को संवार रहे हैं।

Jamshedpur पूर्वी भारत के स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगी अभूतपूर्व मजबूती

कॉलेज के डीन ब्रिगेडियर (डॉ.) एच.सी. बंधु और एमईएमजी के ग्रुप प्रेसिडेंट सोमनाथ दास ने पहले बैच के स्नातक होने को पूरे संस्थान के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण बताया है। वहीं टाटा स्टील (कॉर्पोरेट सर्विसेज) के वाइस प्रेसिडेंट डी.बी. सुंदर रामम ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना का असल उद्देश्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि झारखंड और उसके आसपास के राज्यों के पूरे मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।

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