रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Kota : राजस्थान के कोटा शहर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना और आस्था के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। यहाँ एक शताब्दी पुराने ‘संकटमोचन हनुमान मंदिर’ को हटाने की सुगबुगाहट के बीच श्रद्धालुओं और संतों का गुस्सा फूट पड़ा है। भक्तों की स्पष्ट मांग है कि आस्था के इस केंद्र को उसके मूल स्थान पर ही यथावत रखा जाए।
Kota सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ रहा प्राचीन मंदिर? भक्तों में भारी रोष
कोटा की एक प्रमुख सड़क के चौड़ीकरण के दौरान करीब 100 वर्ष पुराने संकटमोचन हनुमान जी मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। जैसे ही मंदिर को स्थानांतरित करने की चर्चाएँ फैलीं, स्थानीय नागरिकों और बालाजी के भक्तों में नाराजगी व्याप्त हो गई। सोशल मीडिया के माध्यम से एकजुट हुए श्रद्धालुओं ने मंदिर बचाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है।
Kota भक्ति और विरोध का संगम: सामूहिक पाठ से गूँजा मंदिर परिसर
प्रशासन के रुख के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए शाम को सैकड़ों की संख्या में भक्त और संत मंदिर स्थल पर एकत्रित हुए। विरोध के एक अनोखे तरीके के रूप में सभी ने एक साथ मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। संतों ने चेतावनी दी है कि मंदिर के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भक्तों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन वह आस्था की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
Kota मंदिर समिति की बेरुखी और प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ मंदिर समिति को भी आड़े हाथों लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इतना गंभीर मामला होने के बावजूद मंदिर समिति का कोई भी प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुँचा। वहीं, प्रशासन की ओर से भी अब तक कोई स्पष्टीकरण या वैकल्पिक योजना पेश नहीं की गई है, जिससे भ्रम और तनाव की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल, क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और जनता को प्रशासन के आधिकारिक जवाब का इंतजार है।
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