रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Kanker : छत्तीसगढ़ के कांकेर स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) दीपक बैज की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। जिलाध्यक्ष बसंत यादव की मौजूदगी में आयोजित इस बैठक में पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया। बैठक के दौरान जिले में जारी राजनीतिक गतिविधियों, ‘वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान’ की प्रगति तथा स्मार्ट मीटर व अत्यधिक बिजली बिलों के विरोध में चल रहे आंदोलनों को और अधिक तीव्र करने की रणनीति बनाई गई।
मताधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए बूथ स्तर तक पहुंचेगा अभियान
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान के अधिकारों की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्षरत है। उन्होंने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चिंता जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया। बैज ने राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान’ को हर गांव और बूथ स्तर तक ले जाने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने आगामी 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित राष्ट्रीय मार्च में कार्यकर्ताओं से भारी संख्या में शामिल होने की अपील की।
स्मार्ट मीटर और बढ़ते बिजली बिलों के खिलाफ ब्लॉकवार आंदोलन की समीक्षा
बैठक में महंगाई के बीच आम जनता, गरीबों, मजदूरों और किसानों पर बढ़ रहे बिजली बिलों के बोझ पर गहन मंथन किया गया। दीपक बैज ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और उससे उपभोक्ताओं को हो रही समस्याओं को लेकर जिले में जारी ब्लॉकवार आंदोलनों की समीक्षा की। उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सीधे आम जनता के बीच जाएं, उनकी समस्याएं सुनें और स्मार्ट मीटर व बढ़े हुए बिलों के खिलाफ एक बड़ा और व्यापक जनआंदोलन खड़ा करें।
बस्तर दशहरा की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
संगठनात्मक मुद्दों के अलावा बैठक में बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पीसीसी चीफ ने बस्तर दशहरा की प्राचीन ‘जोगी बिठाई’ परंपरा को सुरक्षा व वीआईपी व्यवस्था के नाम पर प्रभावित करने के प्रयासों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि बस्तर की आदिवासी आस्था, पारंपरिक व्यवस्थाएं और संस्कृति छत्तीसगढ़ की अनमोल पहचान हैं, जिनकी मर्यादा और सम्मान की रक्षा करना शासन-प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है।

