One Nation One ElectionOne Nation One Election
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रिपोर्टर: विपिन साहू

One Nation One Election : देश में ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) की अवधारणा को लागू करने के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। समिति अब बार-बार होने वाले चुनावों में लगने वाले समय, संसाधनों और आर्थिक बोझ का सटीक आकलन कर रही है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों के 10 प्रमुख विभागों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष चुनावी खर्चों का पूरा डेटा मांगा गया है, ताकि एक साथ चुनाव कराने के वित्तीय और प्रशासनिक लाभों की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके।

गृह, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित 10 प्रमुख विभागों से मांगा डेटा

संसदीय समिति ने राज्यों के गृह, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय निकाय, पंचायत, कृषि, तकनीकी शिक्षा, राजस्व, पर्यटन और महिला एवं बाल विकास विभाग से जानकारी मांगी है। चुनाव के दौरान सरकारी स्कूलों की इमारतों का उपयोग, शिक्षकों की मतदान ड्यूटी, सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाओं का विस्तृत ब्योरा एकत्र किया जा रहा है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण गृह विभाग का डेटा अभी तक जमा नहीं हो पाया है, जिसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने रिमाइंडर भी भेजा है।

कृषि और सरकारी कामकाज पर चुनावी आचार संहिता के प्रभाव का आकलन

इस पूरी कवायद में सिर्फ वित्तीय खर्च ही नहीं, बल्कि चुनावों के कारण होने वाले अन्य नुकसानों की भी समीक्षा की जा रही है। कृषि विभाग से यह जानकारी मांगी गई है कि पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनावों के कारण खेती-किसानी और बोनी पर कितना प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू होने से सरकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं की मंजूरियों और नियमित प्रशासनिक कार्यों में आने वाले व्यवधानों का मात्रात्मक आकलन दर्ज किया जा रहा है।

वर्ष 2029 से लागू हो सकती है एक देश-एक चुनाव की व्यवस्था

लोकसभा सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी इस बात की जांच कर रही है कि simultaneous elections (एक साथ चुनाव) से देश को कितना आर्थिक फायदा पहुंचेगा। संसद में प्रस्तुत संविधान (129वां संशोधन) विधेयक के तहत 2029 के आम चुनावों से ही इस व्यवस्था को लागू करने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनावों के साथ ही कराए जा सकेंगे, जिससे बार-बार होने वाले खर्चों पर लगाम लगेगी।

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