रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara : झारखंड के जामताड़ा जिले अंतर्गत नारायणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर से एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा बनाए जा रहे नए भवन की छत ढलाई से ठीक पहले ही पूरी सेंटरिंग भरभराकर जमींदोज हो गई। इस हादसे ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और संबंधित ठेकेदार (संवेदक) की कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी है। सौभाग्यवश, दुर्घटना के समय मौके पर किसी मजदूर के मौजूद न होने से बड़ा हादसा टल गया और कोई हताहत नहीं हुआ।
Jamtara ढलाई की तैयारी के दौरान बड़ा हादसा
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह निर्माण कार्य प्रखंड कार्यालय स्थित पुरानी पानी की टंकी के पास कराया जा रहा था। छत का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 150×60 वर्ग फीट क्षेत्र) ढालने की तैयारी चल रही थी। बताया जा रहा है कि ढलाई का काम शुरू होने ही वाला था और लगभग 80 प्रतिशत तैयारी पूरी हो चुकी थी, तभी कमजोर ढाँचे और घटिया सामग्री के कारण सेंटरिंग का मुख्य हिस्सा अचानक ढह गया।
Jamtara जनप्रतिनिधियों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
घटना की खबर फैलते ही स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा गया। नारायणपुर पंचायत के समिति सदस्य पवन पोद्दार ने ठेकेदार और मुख्य कारीगर पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा:
“क्षेत्र की जनता लंबे समय से निर्बाध पेयजल आपूर्ति की आस लगाए बैठी है। ऐसे जनहित के कार्यों में इस प्रकार की घोर लापरवाही बर्दाश्त के बाहर है। जिला प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर निर्माण सामग्री और गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए तथा दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।”
विभागीय अधिकारी का पक्ष और उठते अनुत्तरित प्रश्न
मामले पर सफाई देते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता संतोष महतो ने स्वीकार किया कि दो दिवसीय ढलाई का काम शुरू होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही संरचना गिर गई। फिलहाल विभाग नुकसान और कारणों का आकलन कर रहा है।
हालाँकि, इस हादसे ने कई यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए हैं:
- क्या निर्माण स्थल पर मानकों का अनुपालन किया जा रहा था?
- ठेकेदार द्वारा इस्तेमाल की जा रही सामग्री की पूर्व-जांच क्यों नहीं की गई?
- क्या विभागीय अभियंताओं ने अपनी निगरानी जिम्मेदारी ठीक से निभाई?
स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच पूरी होने तक काम रोकने और संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।

