By: Ravindra Singh
Dhanteras : दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। यह त्योहार सिर्फ धन और वैभव का प्रतीक नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्ध जीवन का संदेश भी देता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की विशेष पूजा की जाती है। घरों में दीप जलाने के साथ सोने-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने की परंपरा भी है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की आराधना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है, जबकि मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में धनतेरस कब मनाई जाएगी, इस पर्व का धार्मिक महत्व क्या है और इस दिन पूजा से लेकर खरीदारी तक किन परंपराओं का पालन किया जाता है।
कब मनाया जाएगा धनतेरस 2026?
Dhanteras धनतेरस का पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना का विशेष महत्व रहेगा।
समुद्र मंथन से जुड़ा है धनतेरस का पौराणिक इतिहास
Dhanteras धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था, तब उससे कई दिव्य रत्न और वस्तुएं निकली थीं। इसी मंथन के अंत में भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। उनके हाथों में अमृत कलश होने के कारण उन्हें आरोग्य और दीर्घायु का प्रतीक भी माना गया है। यही वजह है कि धनतेरस पर उनकी पूजा करके लोग अपने परिवार के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं।
इस पर्व का मूल संदेश है कि धन-संपत्ति के साथ स्वस्थ शरीर और निरोगी जीवन भी सबसे बड़ी पूंजी है।
मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का महत्व
Dhanteras धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के अलावा माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है। धार्मिक मान्यता में माता लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वहीं भगवान कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष और धन का संरक्षक कहा जाता है।
इस दिन श्रद्धालु दोनों की पूजा करके परिवार में आर्थिक उन्नति, सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से घर में सकारात्मकता का संचार होता है।
धनतेरस पर यम दीपदान क्यों किया जाता है?
Dhanteras धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। इसके पीछे एक प्रचलित पौराणिक कथा है।
कथा के अनुसार, एक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग बताया गया था। जब उसकी पत्नी को इस बारे में पता चला तो उसने अपने पति की जान बचाने के लिए पूरी रात जागकर बिताने का निश्चय किया। उसने घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषण तथा अन्य कीमती वस्तुएं रख दीं।
मान्यता है कि जब यमराज राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे, तब दीपकों और आभूषणों की तेज चमक से उनका ध्यान भटक गया। इस तरह राजकुमार की जान बच गई। तभी से धनतेरस की रात यमराज के नाम दीप जलाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन यम दीपदान करने से परिवार पर अकाल मृत्यु का भय कम होता है और घर के सदस्यों की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है।
धनतेरस की पूजा कैसे करें? जानें आसान विधि
Dhanteras धनतेरस के दिन सुबह घर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और शाम के समय पूजा की तैयारी करें। पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- सभी देवी-देवताओं के सामने घी या तेल का दीपक जलाएं।
- रोली, अक्षत, फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- भगवान धन्वंतरि की पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्रार्थना करें।
- माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर से घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
- शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के नाम से दीपक जलाकर यम दीपदान करें।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
Dhanteras धनतेरस को खरीदारी के लिए विशेष शुभ दिन माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपनी सामर्थ्य और जरूरत के अनुसार कई तरह की वस्तुएं खरीदते हैं।
- सोना और चांदी: सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के खरीदना शुभ माना जाता है।
- तांबे और पीतल के बर्तन: इस दिन नई धातुओं के बर्तन खरीदने की परंपरा है।
- लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां: दीपावली की पूजा के लिए इनकी खरीदारी की जाती है।
- झाड़ू: इसे स्वच्छता और घर की नकारात्मकता दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
- नए घरेलू सामान: लोग अपनी जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उपयोगी वस्तुएं भी खरीदते हैं।
हालांकि, किसी भी वस्तु की खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है। अपनी आर्थिक स्थिति और जरूरत को ध्यान में रखकर ही खरीदारी करनी चाहिए।
धनतेरस पर किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
Dhanteras धनतेरस के दिन कुछ धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं का पालन किया जाता है। इस अवसर पर घर को साफ-सुथरा रखने और शाम को दीप जलाने का विशेष महत्व है।
- घर में साफ-सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
- दिखावे के लिए अनावश्यक खरीदारी करने से बचें।
- कर्ज लेकर महंगी वस्तुएं खरीदने से परहेज करें।
- परिवार में किसी भी तरह के विवाद और तनाव से दूर रहें।
- खरीदारी करते समय अपने बजट और जरूरतों का ध्यान रखें।
धनतेरस पर रुपये उधार देने या लेने से बचने की मान्यता भी प्रचलित है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं।
धनतेरस देता है स्वस्थ और समृद्ध जीवन का संदेश
Dhanteras धनतेरस केवल सोना-चांदी खरीदने या धन की पूजा करने का त्योहार नहीं है। यह पर्व हमें जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता, संयम और संतोष का महत्व भी समझाता है। भगवान धन्वंतरि की आराधना जहां निरोगी जीवन की कामना से जुड़ी है, वहीं माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
धनतेरस से दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत होती है। इसके बाद नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज मनाई जाती है। यह पूरा उत्सव परिवार, खुशियों, आपसी प्रेम और नई शुरुआत का संदेश देता है।
ये भी पढे: 6 नवंबर 2026, धनतेरस पर इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

