रिपोर्टर: मुकेश धाकड़
Delhi Power Companies CAG Audit : दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के वित्तीय खातों की जांच को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। दिल्ली सरकार ने आधिकारिक तौर पर बिजली कंपनियों के सीएजी (CAG – नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ऑडिट का आदेश जारी कर दिया है। पिछले कई सालों से इस ऑडिट की मांग की जा रही थी, लेकिन कंपनियां लगातार इसका विरोध कर रही थीं। अब अदालत से भी कोई राहत न मिलने के बाद आखिरकार सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।
Delhi Power Companies CAG Audit तीन महीने के भीतर सौंपनी होगी ऑडिट रिपोर्ट
सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, सीएजी को यह पूरा वित्तीय ऑडिट आगामी 3 महीनों के भीतर मुकम्मल करना होगा। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान भी बिजली कंपनियों के सीएजी ऑडिट की काफी चर्चाएं और मांगें उठी थीं, लेकिन कानूनी दांव-पेंच और कंपनियों के कड़े रुख के कारण इसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका था। अब वर्तमान रेखा गुप्ता सरकार के नेतृत्व में दिल्ली में पहली बार बिजली कंपनियों का यह विशेष ऑडिट होने जा रहा है।
Delhi Power Companies CAG Audit मुनाफे के बीच ₹38 हजार करोड़ के कर्ज का रहस्य
इस पूरी जांच का मुख्य केंद्र बिंदु बिजली कंपनियों पर बकाया 38 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि है। दिल्ली सरकार का तर्क है कि यदि बिजली कंपनियां लगातार मुनाफे में चल रही हैं और उस मुनाफे का एक तय हिस्सा (शेयर) सरकार को भी नियमित रूप से मिल रहा है, तो फिर इतना बड़ा बकाया कैसे खड़ा हो गया? सरकार इस विरोधाभास के पीछे की असली वित्तीय सच्चाई को जनता के सामने लाना चाहती है।
Delhi Power Companies CAG Audit पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रशासन का मानना है कि इस गहन ऑडिट के जरिए बिजली कंपनियों के राजस्व, कुल खर्च, सरकारी सब्सिडी, बिजली खरीद की वास्तविक लागत और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की बारीकी से स्क्रूटनी (जांच) की जाएगी। इसका सीधा उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और बिजली क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता लाना है। सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सीएजी की जांच में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता, हेरफेर या कुप्रबंधन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

