रिपोर्टर: रंजन कुमार
Sheikhpura : बिहार के शेखपुरा जिला स्थित सदर अस्पताल से स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलती एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। जिस एम्बुलेंस सेवा का प्राथमिक कार्य आपातकालीन परिस्थिति में मरीजों और शवों को समय पर उनके गंतव्य तक पहुंचाना है, वह खुद ही बदहाली का शिकार हो चुकी है। अस्पताल परिसर में तैनात शव वाहन एम्बुलेंस की तकनीकी स्थिति इतनी खस्ताहाल है कि उसे चालू करने के लिए रोजाना कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को मिलकर धक्का लगाना पड़ रहा है।
Sheikhpura खटारा वाहनों के भरोसे आपातकालीन सेवाएं
सदर अस्पताल में मौजूद शव एम्बुलेंस पूरी तरह जर्जर और खटारा हो चुकी है। इमरजेंसी सेवाओं के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इन वाहनों की नियमित मरम्मत (मेंटेनेंस) न होना अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। वाहन की बैटरी और इंजन इस कदर खराब स्थिति में हैं कि बिना चार-पांच लोगों के धक्के के गाड़ी का स्टार्ट होना असंभव हो गया है।
Sheikhpura कर्मचारियों और परिजनों का ‘धक्कामार’ फॉर्मूला
अस्पताल परिसर में जब भी किसी शव को ले जाने की आवश्यकता होती है, तो चालकों को कर्मचारियों और तीमारदारों की मदद लेनी पड़ती है। कड़ाके की धूप हो या रात का समय, जब तक वाहन को ज़ोरदार धक्का नहीं दिया जाता, तब तक वह चालू नहीं होता। दुख की घड़ी में अस्पताल पहुंचे परिजनों को भी इस अव्यवस्था के कारण भारी शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मेंटेनेंस में भारी लापरवाही, उठ रहे गंभीर सवाल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला स्तर पर बेहतर बुनियादी सुविधाएं और त्वरित आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। हालांकि, शेखपुरा की यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां कर रही है। आपातकालीन वाहनों के रख-रखाव में की जा रही यह अनदेखी किसी बड़े संकट का कारण बन सकती है। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेते हुए नई एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की है।

