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रिपोर्टर: विजय गुप्‍ता

Datia : मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर दतिया से लगभग सात किलोमीटर दूर खैरी गांव की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित खैरी माता का मंदिर इन दिनों शारदीय नवरात्र के अवसर पर आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है। यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुँच रहे हैं। इस प्राचीन मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ विराजी मां काली दिन में तीन अलग-अलग रूपों में नजर आती हैं, जिससे इस स्थान की मान्यता और भी अधिक खास हो जाती है।

दिन में तीन स्वरूप बदलने का रहस्य

Datia स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित माता के विग्रह के बारे में कहा जाता है कि वे पहर के अनुसार अपने स्वरूप में बदलाव करती हैं। सुबह के समय माता के दर्शन बाल रूप में होते हैं, दोपहर ढलने पर उनका स्वरूप युवावस्था जैसा प्रतीत होता है, और शाम के समय वृद्धावस्था की छवि दिखाई देती है। इसी चमत्कारी और अनोखी विशेषता के कारण दतिया शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में भक्त यहाँ मत्था टेकने आते हैं।

1658 में हुआ था निर्माण और अनोखी स्थापना कथा

Datia ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1658 में तत्कालीन दतिया नरेश महाराजा वीरसिंह जू देव द्वारा करवाया गया था। उस दौर में इस पहाड़ी क्षेत्र में खैर के पेड़ों की बहुतायत थी और इसे ‘खैरागढ़’ के नाम से जाना जाता था। किंवदंतियों के मुताबिक, राजा को स्वप्न में सेंवढ़ा के सनकुआं में माता की प्रतिमा होने का संकेत मिला था, जिसके बाद राजा ने हाथी-घोड़ों के माध्यम से प्रतिमा को यहाँ लाकर स्थापित किया। इन्हें ‘मनकामेश्वर देवी’ के रूप में भी पूजा जाता है।

नवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान और सीढ़ियों का महत्व

Datia शारदीय और चैत्र नवरात्र के पावन पर्वों पर यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान यहाँ तीन दिनों तक विशेष अनुष्ठान और मेला आयोजित होता है, जिसमें सप्तमी से लेकर बारस तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होते हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को 100 से अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिन पर कई बड़े और प्राचीन घंटे टंगे हुए हैं। समय के साथ श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के सामूहिक सहयोग से इस धार्मिक स्थल का निरंतर विकास किया जा रहा है।

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