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रिपोर्टर: संजीव कुमार शर्मा

Bokaro : झारखंड के बोकारो जिले के मुख्य चिकित्सा केंद्र, सदर अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सकों की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Specialist) डॉ. आरपी सिंह पर एक मरीज के परिजनों ने न केवल अभद्र व्यवहार करने, बल्कि चेंबर के भीतर मारपीट करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा।

Bokaro रिपोर्ट दिखाने को लेकर शुरू हुआ विवाद

मिली जानकारी के अनुसार, चास के काला पत्थर क्षेत्र की रहने वाली कपूरा देवी ने अपने बेटे को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है। गुरुवार को कपूरा देवी अपने बेटे और भाई के साथ डॉ. आरपी सिंह के चेंबर में मरीज की मेडिकल रिपोर्ट दिखाने पहुंची थीं।

परिजनों का आरोप है कि बातचीत के दौरान ही किसी बात को लेकर डॉक्टर उखड़ गए और उन्होंने मरीज के भाई और मां के साथ बदतमीजी शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि डॉक्टर ने उन्हें चेंबर से बाहर निकलने को कह दिया। परिजनों का दावा है कि इस दौरान डॉक्टर ने उनके साथ हाथापाई भी की।

Bokaro चेंबर के बाहर सुरक्षाकर्मियों से भी हुई बहस

घटना के समय डॉक्टर के चेंबर के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात थे। सोशल मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के जरिए सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि चेंबर से बाहर निकाले जाने के बाद भी परिजन काफी आक्रोशित थे और वहां मौजूद गार्ड्स के साथ उनकी तीखी बहस हो रही थी।

मरीज की मां कपूरा देवी ने रोते हुए मीडिया को बताया कि वे केवल अपने बेटे के स्वास्थ्य की जानकारी लेने गए थे, लेकिन उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। चेंबर के अंदर क्या हुआ, इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है, लेकिन परिजनों के आरोपों ने अस्पताल प्रबंधन को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है।

Bokaro डॉक्टर की चुप्पी और प्रशासन की भूमिका

जब इस पूरे मामले को लेकर आरोपी चिकित्सक डॉ. आरपी सिंह से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया। डॉक्टर की इस चुप्पी ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।

सदर अस्पताल में पहले भी डॉक्टरों और मरीजों के बीच विवाद के मामले सामने आते रहे हैं। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • सीसीटीवी फुटेज: यदि चेंबर या गलियारे में सीसीटीवी लगा है, तो उसकी जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।
  • अस्पताल प्रबंधन: सिविल सर्जन को इस मामले में हस्तक्षेप कर एक जांच कमेटी बनानी चाहिए।
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ-साथ मरीजों के सम्मानजनक इलाज के लिए भी दिशा-निर्देश तय होने चाहिए।

फिलहाल, इस मामले में अभी तक कोई लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन परिजनों का कहना है कि वे इस अपमान के खिलाफ उच्च अधिकारियों तक जाएंगे।

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