EditorialEditorial
Spread the love
वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल

Editorial : राजद से राजनीति की शुरुआत करने वाले सम्राट चौधरी अब बिहार में बीजेपी की पहली सरकार का नेतृत्व करेंगे।यानि वे चौधरी से सम्राट बना दिए गए हैं.बीजेपी विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा ने रखा।

बीजेपी को बिहार की सत्ता हासिल करने के लिए पूरे 46 साल तप करना पडा. इतना लंबा धैर्य रखने की क्षमता शायद ही किसी दूसरे राजनीतिक दल के पास हो.भाजपा बिहार में सत्ता की भागीदारी तो करती रही लेकिन उसे अपना मुख्यमंत्री बनाने में कामयाबी अब जाकर मिली है..

बिहार में अब बीजेपी की सरकार है, और जोडतोड की इस सरकार के मुखिया 9 साल पहले भाजपा में आए सम्राट चौधरी हैं.चौधरी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने कौल के मुताबिक सम्राट चौधरी को बडा आदमी तो बना दिया किंतु वे कितने दिन इस पद को सम्हाल सकेंगे, कहना कठिन है.क्योकि मुख्यमंत्री तो विजय कुमार सिन्हा को बनना था. सिन्हा ने फिलहाल भाजपा का सिपाही होने के नाते अपने कमांडर के आदेश के अनुसार सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया।

बिहार में सत्ता सुख के लिए नेता घाट-घाट का पानी पीते हैं. यानि दलबदल ऐसे करते हैं जैसे चड्डी-बनियान बदल रहे हों. ऐसे में सिन्हा द्वारा भाजपा के सिपाही होने की दुहाई देना मायने रखता है. वे अपमान का घूंट पीकर ये कहने के लिए विवश किए गए हैं कि-आज कमल खिलाने का अवसर आया… और मैंने भाजपा के सिपाही के नाते अपने कमांडर के आदेश के अनुसार, गठबंधन की राजनीति को लेकर चलने के लिए हमने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया है।”

बिहार की राजनीति में इस बदलाव के संकेत पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान ही मिल गए थे, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक चुनावी सभा में कहा था कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ”बड़ा आदमी” बनाया जाएगा। शाह ने सम्राट के लिए जदयू से अनैतिक सौदेबाजी की. ठीक उसी तरह है जिस तरह 2020 में मप्र में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ की थी.

सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी एक पूर्व सैनिक थे। बाद में वो राजनीति में आ गए। शकुनी चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की थी और बाद में अलग-अलग समय में लालू प्रसाद तथा नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे।

सम्राट चौधरी ने साल 2017 में बीजेपी ज्वाइन की थी.इससे पहले वह एक दशक से अधिक समय तक राजद में रहे और करीब दो वर्ष तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पार्टी जदयू में भी रहे। सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के रूप में की थी।वे कब फिर दलबदल लें इसकी गारंटी वे खुद नहीं दे सकते.

सम्राट ने चौधरी बनने के लिए बडे पापड बेले.राजद के वर्ष 2005 में सत्ता से बाहर होने के बाद भी वह लंबे समय तक इस पार्टी के साथ बने रहे, लेकिन 2014 में एक बागी धड़े के साथ जद(यू) में शामिल हो गए, जब जीतन राम मांझी राज्य के मुख्यमंत्री थे। तीन वर्ष बाद उन्होंने जद(यू) छोड़कर बीजेपी का रुख किया,

सम्राट चौधरी कोइरी समुदाय से आने वाले बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले 1968 में सतीश प्रसाद सिंह इस समुदाय से मुख्यमंत्री बने थे, जिनका कार्यकाल मात्र पांच दिन का रहा था। अब शीर्ष पद पर पहुंचने के बाद सम्राट चौधरी के सामने बिहार में भाजपा को एक मजबूत राजनीतिक आधार के रूप में स्थापित करने की चुनौती होगी।सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद पर देखकर स्वर्गवासी हो चुके सुशील मोदी की आत्मा अवश्य व्यग्र होगी. क्योंकि मोदी ने आज के मोशा से पहले बिहार में भाजपा के लिए जमीन बनाई थी, लेकिन वे कभी भी मुख्यमंत्री नहीं बन सके.

Also Read This: Bhojpur: हाई वोल्टेज ड्रामा, प्रेमी से शादी की जिद में 200 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ी नाबालिग, पुलिस ने ऐसे बचाई जान