by-Ravindra Sikarwar
न्यूयॉर्क में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अमेरिकी ऊर्जा विभाग के सचिव क्रिस राइट ने भारत को “भारी प्रशंसक” (huge fan) और “शानदार सहयोगी” (awesome ally) बताते हुए ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और ऊर्जा मांग को रेखांकित करते हुए प्राकृतिक गैस, कोयला, परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ रसोई ईंधन जैसे क्षेत्रों में व्यापार व सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। यह बयान भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में आया है, जिन्होंने कहा था कि नई दिल्ली वाशिंगटन के साथ ऊर्जा उत्पादों के व्यापार को बढ़ाने की उम्मीद कर रही है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। राइट ने भारत को स्वच्छ रसोई ईंधन में “तारा” (star) करार दिया, जो वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में भारत की भूमिका को दर्शाता है।
बयान का संदर्भ और पृष्ठभूमि:
24 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क विदेशी प्रेस सेंटर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राइट ने पीटीआई के एक सवाल के जवाब में भारत के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं भारत का भारी प्रशंसक हूं। हम भारत से प्यार करते हैं। हम भारत के साथ अधिक ऊर्जा व्यापार और आपसी आदान-प्रदान की उम्मीद करते हैं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार यूक्रेन युद्ध के कारण अस्थिर है, और भारत रूसी तेल खरीदने के कारण अमेरिकी दबाव का सामना कर रहा है। राइट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत को दंडित करने का इरादा नहीं रखता, बल्कि शांति स्थापना और ऊर्जा सहयोग पर फोकस करना चाहता है। उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, और मुझे विश्वास है कि भारत भी यही चाहता है। अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है, और हम भारत के साथ व्यापार बढ़ाना चाहते हैं।”
राइट ने अपने पदभार संभालने के शुरुआती दिनों में भारत से जुड़े मुद्दों पर काम करने का जिक्र किया। उन्होंने भारत को “विश्व की सबसे बड़ी लोकतंत्र” और “तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था” बताते हुए कहा कि बढ़ती समृद्धि और अवसरों के कारण भारत की ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है। यह बयान अमेरिका-भारत रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी (SCEP) के मंत्रिस्तरीय संयुक्त बयान से भी जुड़ता है, जिसमें दोनों देशों ने ऊर्जा व्यापार को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन देने वाला महत्वपूर्ण कारक माना है।
ऊर्जा सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:
राइट ने कई विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, जो भारत की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं और अमेरिका की निर्यात क्षमता को पूरक बनाते हैं:
- प्राकृतिक गैस और कोयला: अमेरिका भारत को प्राकृतिक गैस और कोयले के निर्यात में वृद्धि करना चाहता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। राइट ने कहा कि ये संसाधन भारत की बढ़ती औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होंगे।
- परमाणु ऊर्जा: दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग को गहरा करने की योजना है, जिसमें सिविल न्यूक्लियर डील के तहत तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं। भारत के लिए यह किफायती स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प साबित हो सकता है, जैसा कि गोयल ने हाल ही में न्यूयॉर्क में ऊर्जा सुरक्षा इवेंट में उल्लेख किया था।
- स्वच्छ रसोई ईंधन और एलपीजी: राइट ने भारत को इस क्षेत्र में “तारा” बताते हुए सराहना की। भारत की उज्ज्वला योजना और स्वच्छ रसोई अभियान को अमेरिका समर्थन देना चाहता है, जिसमें एलपीजी और अन्य स्वच्छ ईंधनों का निर्यात शामिल है। यह ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा।
- नवीकरणीय ऊर्जा: बयान में नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष फोकस रहा, जिसमें सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन शामिल हैं। अमेरिका भारत को तकनीक और निवेश प्रदान करने को तैयार है, जो भारत के 500 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य को गति देगा। SCEP के तहत, दोनों देश ऊर्जा दक्षता, सुपर-दक्ष उपकरणों और कूलिंग सिस्टम के निर्माण में सहयोग करेंगे।
ये क्षेत्र न केवल व्यापार बढ़ाएंगे, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद करेंगे। राइट ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ “कुछ भी अधिक नहीं चाहता” सिवाय ऊर्जा सहयोग के विस्तार के।
द्विपक्षीय संबंधों का महत्व:
अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत, जो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर है। यूक्रेन युद्ध के कारण रूसी तेल पर भारत की निर्भरता ने वैश्विक तनाव पैदा किया है, लेकिन राइट ने इसे अवसर के रूप में देखा। उन्होंने कहा, “भारत वैश्विक ऊर्जा व्यापार के बीच में फंसा हुआ है, लेकिन हम शांति चाहते हैं और अमेरिकी तेल बेचना चाहते हैं।”
इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल ही में (22 सितंबर 2025 को) भारत के साथ व्यापार, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और महत्वपूर्ण खनिजों में निरंतर जुड़ाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के लिए “महत्वपूर्ण संबंध” है। क्वाड (चतुर्भुज) के माध्यम से दोनों देश मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बढ़ावा देंगे।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां:
राइट के बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा व्यापार दोगुना हो सकता है। भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों में अमेरिका की भूमिका बढ़ेगी, जिसमें स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन, आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और हरित तकनीकों का विकास शामिल है। हालांकि, चुनौतियां भी हैं, जैसे रूस से तेल आयात पर अमेरिकी प्रतिबंध और भू-राजनीतिक दबाव। राइट ने जोर दिया कि अमेरिका भारत को “दंडित” नहीं करना चाहता, बल्कि साझेदारी मजबूत करना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग भारत को नेट-जीरो लक्ष्य (2070) की ओर ले जाएगा और अमेरिका को एशियाई बाजार में मजबूत स्थिति देगा। दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं इस दिशा में सकारात्मक हैं।
निष्कर्ष:
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई गर्मजोशी का प्रतीक है, जो ऊर्जा व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। नवीकरणीय ऊर्जा और निर्यात में विस्तारित सहयोग न केवल आर्थिक लाभ देगा, बल्कि वैश्विक शांति और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करेगा। यदि आप ऊर्जा क्षेत्र या द्विपक्षीय संबंधों में रुचि रखते हैं, तो इन विकास पर नजर रखें। अधिक जानकारी के लिए अमेरिकी ऊर्जा विभाग की वेबसाइट या भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक स्रोत देखें।
