by-Ravindra Sikarwar
एक नए जीएसटी 2.0 (वस्तु एवं सेवा कर) को लेकर चर्चा जोरों पर है, और कुछ रिपोर्ट्स का सुझाव है कि इसका प्रभाव लोगों के खान-पान की आदतों पर पड़ सकता है और साथ ही फूड डिलीवरी ऐप्स की तुलना में सीधे रेस्टोरेंट से ऑर्डर करने को बढ़ावा मिल सकता है।
क्या है जीएसटी 2.0?
अभी तक जीएसटी 2.0 का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं आया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें निम्नलिखित बदलाव हो सकते हैं:
- स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों पर कम कर: यह संभव है कि सरकार आहार स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए पौष्टिक और स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों पर जीएसटी दरें कम कर दे। जैसे- फल, सब्जियां, मोटे अनाज और कम वसा वाले उत्पादों पर टैक्स कम किया जा सकता है।
- प्रोसेस्ड और जंक फूड पर अधिक कर: इसके विपरीत, प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी और नमक वाले उत्पादों और जंक फूड पर जीएसटी दरें बढ़ाई जा सकती हैं। इसका उद्देश्य अस्वास्थ्यकर भोजन की खपत को कम करना है।
फूड डिलीवरी ऐप्स पर संभावित प्रभाव:
यह भी चर्चा है कि नए जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा असर फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे कि ज़ोमैटो और स्विगी पर पड़ सकता है।
- रेस्टोरेंट से सीधे ऑर्डर को बढ़ावा: यदि जीएसटी की नई व्यवस्था में फूड डिलीवरी ऐप्स द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है, तो लोग सीधे रेस्टोरेंट से ऑर्डर करना पसंद कर सकते हैं। इससे उन्हें कुछ पैसों की बचत होगी।
- लागत में वृद्धि: यदि फूड डिलीवरी ऐप्स के लिए टैक्स दरें बढ़ती हैं, तो वे अपनी सेवाओं की लागत ग्राहकों पर डाल सकते हैं। इससे डिलीवरी का खर्च बढ़ जाएगा और लोग ऐप्स का उपयोग कम कर सकते हैं।
हालांकि, ये सभी केवल अटकलें हैं और सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो निश्चित तौर पर इनका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
