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रायसेन (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के रायसेन जिले स्थित हलाली बांध के प्राकृतिक रहवास में दो सफेद पीठ वाले गिद्ध (White-backed Vulture – Gyps bengalensis) और चार लंबी चोंच वाले गिद्ध (Long-billed Vulture – Gyps indicus) को सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य इन संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों की संख्या को बढ़ाना है। छोड़े गए सभी गिद्धों की गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखने के लिए उन्हें आधुनिक GPS-GSM ट्रैकर्स से लैस किया गया है।

गिद्धों के पुनर्वास की इस प्रक्रिया से पहले, 8 अप्रैल 2025 को उनका गहन स्वास्थ्य परीक्षण और शारीरिक माप (मॉर्फोमेट्री) किया गया था। विशेषज्ञों की टीम ने प्रत्येक गिद्ध की शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन किया और उनके रक्त के नमूने भी जांचे। इन व्यापक परीक्षणों के निष्कर्षों से यह पुष्टि हुई कि सभी छह गिद्ध स्वस्थ हैं और प्राकृतिक वातावरण में छोड़े जाने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर मृत जानवरों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में। इनकी संख्या में हाल के वर्षों में आई भारी गिरावट चिंता का विषय है। इस पुनर्वास कार्यक्रम के माध्यम से, विभाग का लक्ष्य न केवल इन गिद्धों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है, बल्कि उनकी आबादी को स्थिर करने और धीरे-धीरे बढ़ाने में भी योगदान देना है।

GPS-GSM ट्रैकर तकनीक इन गिद्धों की दैनिक गतिविधियों, उनके उड़ान मार्गों, भोजन स्थलों और उनके द्वारा स्थापित किए गए नए क्षेत्रों की जानकारी प्रदान करेगी। इस डेटा का उपयोग उनकी अनुकूलन क्षमता का अध्ययन करने और भविष्य में संरक्षण प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। यह तकनीक वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को यह भी जानकारी देगी कि क्या गिद्ध किसी खतरे का सामना कर रहे हैं, जिससे समय पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

हलाली बांध क्षेत्र को गिद्धों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक रहवास के रूप में चुना गया है क्योंकि यहां उनकी भोजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त मृत जानवर उपलब्ध हैं और यह क्षेत्र उनके घोंसले बनाने के लिए भी उपयुक्त है। इस पहल को स्थानीय वन्यजीव संरक्षण संगठनों और विशेषज्ञों का भी समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने गिद्धों के चयन और उनके स्वास्थ्य परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह पुनर्वास कार्यक्रम गिद्धों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि GPS-GSM ट्रैकर से प्राप्त जानकारी भविष्य में गिद्धों की आबादी को बचाने और बढ़ाने के लिए और भी प्रभावी रणनीतियाँ विकसित करने में सहायक होगी। उन्होंने स्थानीय समुदायों से भी अपील की कि वे गिद्धों के संरक्षण में सहयोग करें और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में मदद करें।

यह पहल मध्य प्रदेश में गिद्धों के संरक्षण के प्रयासों को एक नई दिशा प्रदान करती है और उम्मीद जगाती है कि इन महत्वपूर्ण सफाईकर्मियों को प्राकृतिक वातावरण में फिर से फलने-फूलने का अवसर मिलेगा।