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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इलेक्ट्रिक वाहनों और ई-रिक्शा पर लगाई जाने वाली हरी नंबर प्लेट यातायात पुलिस के लिए एक बड़ी तकनीकी परेशानी बन गई है। शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों की निगरानी के लिए स्थापित हाईटेक आईटीएमएस (ITMS) और एआई (AI) आधारित कैमरे इन हरी नंबर प्लेटों को ठीक से पढ़ने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। सामान्य नंबर प्लेट को लगभग 40 फीट की दूरी से कैप्चर करने वाले ये कैमरे, हरी नंबर प्लेट को 25 फीट की दूरी से भी स्पष्ट रूप से पहचान नहीं पा रहे हैं।

कैमरों की पहचान में क्यों आ रही है बाधा?

Raipur तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, हरी नंबर प्लेट के रंग संयोजन, उस पर लिखे फॉन्ट और दिन के समय पड़ने वाली परावर्तित (Reflected) रोशनी के कारण कैमरे इसके अक्षरों को स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड नहीं कर पा रहे हैं। रात के समय कम रोशनी में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। परिणाम यह हो रहा है कि रेड लाइट जंप करने या रॉन्ग साइड वाहन चलाने वाले ई-वाहन चालकों के चालान स्वचालित रूप से काटने में दिक्कत आ रही है।

अपराध और हादसों की जांच में आ सकती है मुश्किल

Raipur पुलिस के लिए यह तकनीकी खामी केवल चालान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और आपराधिक मामलों की जांच के लिए भी चिंता का विषय है। यदि कोई संदिग्ध वाहन या ई-रिक्शा किसी अपराध में इस्तेमाल होता है, तो नंबर स्पष्ट न होने के कारण उसे ट्रैक करना और आरोपी तक पहुँचना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, पुलिस वाहनों के मॉडल, रंग और अन्य सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।

समाधान के लिए 150 करोड़ का प्रस्ताव और क्यूआर कोड की व्यवस्था

Raipur इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस विभाग दो विकल्पों पर विचार कर रहा है: पहला, शहर में अत्याधुनिक एएनपीआर (ANPR) कैमरे लगाना, जिस पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है; और दूसरा, परिवहन आयुक्त को हरी नंबर प्लेट के डिजाइन और रंगों में बदलाव करने का सुझाव भेजना। इसके अलावा, पुलिस ने लगभग 17 हजार ई-रिक्शा का पंजीयन कर उनके लिए क्यूआर (QR) कोड जनरेट किए हैं, जिससे उनकी पहचान और सत्यापन में मदद मिल सके।

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