Gwalior Stepwell Conservation:ग्वालियर में प्राचीन कुओं और बावड़ियों के संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की गई है। इस दौरान बावड़ी की सफाई और उसके संरक्षण का संकल्प लिया गया। इस पहल के तहत पुराने जलस्रोतों को कचरे, अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कर उन्हें दोबारा उपयोगी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
जल संरक्षण के साथ जुड़ी है बावड़ियों की विरासत
Gwalior Stepwell Conservation:बावड़ियां केवल ऐतिहासिक इमारतें नहीं हैं, बल्कि भारतीय जल प्रबंधन की पारंपरिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। पुराने समय में वर्षा के पानी को जमा करने और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए कुएं और बावड़ियां बनाई जाती थीं।
समय के साथ कई प्राचीन जलस्रोत उपेक्षा, गंदगी और अतिक्रमण की चपेट में आ गए। ऐसे में इनके संरक्षण के साथ-साथ बारिश के पानी को इन जलस्रोतों से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
ग्वालियर में हजारों कुएं और बावड़ियां
Gwalior Stepwell Conservation:ग्वालियर को आमतौर पर ‘तानसेन की नगरी’ के नाम से जाना जाता है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 3,000 कुएं और बावड़ियां होने का दावा किया गया है। ऐसे में प्राचीन जलस्रोतों के संरक्षण के प्रयासों से ग्वालियर को ‘बावड़ियों का शहर’ कहा जाना भी सार्थक हो सकता है।
इन ऐतिहासिक जलस्रोतों का संरक्षण शहर की सांस्कृतिक विरासत के साथ जल सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
18 जलस्रोतों को मिल चुका है नया जीवन
Gwalior Stepwell Conservation:बयान के मुताबिक, अब तक 18 कुएं और बावड़ियों को साफ कर दोबारा जीवंत करने का काम किया जा चुका है। इसी क्रम में यह 19वीं बावड़ी है, जिसके संरक्षण का काम शुरू किया गया है।
उद्देश्य इस प्राचीन जलस्रोत की सफाई करने के साथ इसे दोबारा उपयोगी बनाना है, ताकि इसमें स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सके।
आने वाली पीढ़ियों के लिए बचानी होगी जल विरासत
Gwalior Stepwell Conservation:बावड़ियों के संरक्षण को केवल पुरानी संरचनाओं की देखभाल तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इन जलस्रोतों को सुरक्षित रखने से पारंपरिक जल प्रबंधन की जानकारी और स्थानीय इतिहास भी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकता है।
पहल से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि प्राचीन बावड़ियों को संरक्षित किया जाता है और उनमें वर्षा जल का संचयन किया जाता है, तो इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। 19वीं बावड़ी को भी जल्द स्वच्छ और उपयोगी बनाने के लक्ष्य के साथ प्राचीन जल विरासत को बचाने का संकल्प दोहराया गया है।

