By: Ravindra Singh
Pitru Paksha : पितृ पक्ष सनातन धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का विशेष अवसर माना जाता है। इन दिनों पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से श्राद्ध कर्म करने के बाद पितरों की आरती करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष में आरती करने का सही तरीका और श्री पितृ आरती के संपूर्ण बोल।
पितृ पक्ष में आरती का क्या है महत्व?
Pitru Paksha हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति आभार व्यक्त करने का समय माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों को संतुष्टि मिलती है। इसी परंपरा के अंतर्गत श्राद्ध कर्म संपन्न होने के बाद पितरों की आरती की जाती है।
आरती के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण कर परिवार की खुशहाली, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है। इसे पितरों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण धार्मिक माध्यम माना जाता है।
श्राद्ध के बाद किस प्रकार करें पितरों की पूजा?
Pitru Paksha पितृ पक्ष में जिस दिन पूर्वजों की श्राद्ध तिथि हो, उस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पितरों के निमित्त सात्विक भोजन तैयार करें। अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक विधि के अनुसार तर्पण, पिंडदान, पंचबलि सहित अन्य श्राद्ध कर्म पूरे करें।
सभी अनुष्ठान संपन्न होने के बाद पितरों का ध्यान करते हुए उनकी आरती करें। पूजा के दौरान मन में श्रद्धा और पवित्र भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
पितरों की आरती करते समय करें इन मंत्रों का जाप
Pitru Paksha आरती से पहले पूजा स्थल पर शुद्ध घी का दीपक और धूप प्रज्वलित करें। इसके बाद पूर्वजों का स्मरण करते हुए निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
- ॐ पितृ देवताभ्यो नमः।
- ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।
मंत्र जाप के पश्चात पूरे परिवार के साथ श्रद्धापूर्वक श्री पितृ आरती करें।
श्री पितृ आरती के संपूर्ण बोल
Pitru Paksha पितरों की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पढ़ें पारंपरिक आरती
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़यो हूं थारी।
शरण पड़यो हूँ थारी बाबा, शरण पड़यो हूँ थारी॥
आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे।
मैं मूरख हूँ कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे॥
जय जय पितरजी महाराज।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी॥
जय जय पितरजी महाराज।
देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई॥
जय जय पितरजी महाराज।
भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवार।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार॥
जय जय पितरजी महाराज।
आरती के बाद पितरों से मांगें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
Pitru Paksha पितरों की आरती पूरी होने के बाद हाथ जोड़कर अपने पूर्वजों का स्मरण करें और परिवार की सुख-शांति, उन्नति तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना करें। उनसे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने और सभी सदस्यों को सुखी जीवन का आशीर्वाद देने की कामना करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्रद्धा और सम्मान के साथ किए गए श्राद्ध, तर्पण और आरती जैसे कर्म पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम हैं। इस दौरान परिवार के सभी सदस्यों को अपनी परंपराओं के अनुसार पितरों का स्मरण करना चाहिए।
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