Pitru PakshaPitru Paksha
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By: Ravindra Singh

Pitru Paksha : पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन अनुष्ठानों से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है।

इस वर्ष 5 अक्टूबर 2026 को पितृ पक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। आइए जानते हैं दशमी श्राद्ध किसके लिए किया जाता है, कुतुप और रौहिण मुहूर्त कब रहेगा और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

दशमी श्राद्ध 2026 का शुभ मुहूर्त

Pitru Paksha पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 5 अक्टूबर को तड़के 3:53 बजे शुरू होगी और 6 अक्टूबर की रात 2:07 बजे समाप्त होगी।

दशमी तिथि पर श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। 5 अक्टूबर को कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुतुप और रौहिण, दोनों ही समय श्राद्ध कर्म के लिए शुभ माने जाते हैं।

दशमी तिथि पर किन पितरों का श्राद्ध होता है?

Pitru Paksha दशमी श्राद्ध उन परिवारजनों या पूर्वजों की स्मृति में किया जाता है, जिनका निधन दशमी तिथि को हुआ हो। यह नियम शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की दशमी तिथि पर लागू माना जाता है। इसे दसमी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशमी श्राद्ध गृहस्थ जीवन पूरा कर चुके और वंश परंपरा को आगे बढ़ाने वाले पितरों को समर्पित किया जाता है। कुछ परंपराओं में इस तिथि को वानप्रस्थ आश्रम से जुड़े पितरों के श्राद्ध के लिए भी उपयुक्त माना गया है।

शास्त्रों में सामान्य रूप से उसी तिथि पर श्राद्ध करने को विशेष महत्व दिया गया है, जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ हो। यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है, तो ऐसे पितरों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन करने की परंपरा है।

दशमी श्राद्ध के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान

पंचबलि जरूर निकालें: श्राद्ध का भोजन तैयार होने के बाद पंचबलि की परंपरा के अनुसार गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए भोग निकालने की मान्यता है।

सात्विक भोजन बनाएं: श्राद्ध के लिए भोजन बनाते समय स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

ब्राह्मण भोजन और दान: श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देने की परंपरा है।

दक्षिण दिशा का रखें ध्यान: तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करने की परंपरा बताई गई है, क्योंकि इसे पितरों की दिशा माना जाता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध का महत्व

Pitru Paksha पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया श्राद्ध और तर्पण पितरों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम है। इसलिए पितृ पक्ष की संबंधित तिथि पर परिवार की परंपरा और मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म किया जाता है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं किया जाता है।

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