Long Working HoursLong Working Hours
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By: Ravindra Singh

Long Working Hours : आज की व्यस्त जीवनशैली में लंबे समय तक ऑफिस में काम करना, घंटों कुर्सी पर बैठे रहना, तनाव और नींद पूरी न होना आम बात हो गई है। शुरुआत में इन आदतों का असर केवल थकान या चिड़चिड़ापन के रूप में नजर आ सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा रूटीन अपनाने से हृदय स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

लगातार ज्यादा घंटे काम करने के साथ अगर शारीरिक गतिविधि कम हो, खान-पान असंतुलित हो और नींद भी पूरी न हो, तो हाई ब्लड प्रेशर, वजन बढ़ने, डायबिटीज और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

लंबे वर्किंग आवर्स और हार्ट डिजीज का संबंध

Long Working Hours सप्ताह में बहुत अधिक घंटे काम करने वाले लोगों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ने की बात कई अध्ययनों में सामने आई है। WHO और ILO के शोध के अनुसार, सप्ताह में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने को 35-40 घंटे काम करने की तुलना में स्ट्रोक और इस्कीमिक हार्ट डिजीज से मृत्यु के अधिक जोखिम से जोड़ा गया है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि एक निश्चित घंटे से अधिक काम करने पर हर व्यक्ति को हार्ट अटैक होगा। हालांकि, लंबे समय तक लगातार ऐसा कार्य-रूटीन रहने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

काम का तनाव दिल पर कैसे डालता है असर?

Long Working Hours लगातार काम का दबाव, डेडलाइन और आराम के लिए पर्याप्त समय न मिलना शरीर में तनाव की स्थिति पैदा कर सकता है। लंबे समय तक तनाव रहने पर कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन्स का स्तर प्रभावित हो सकता है।

इससे हृदय गति और ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हृदय की धमनियों से जुड़ी समस्या है, उन्हें लंबे समय तक तनाव और अधिक काम के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

घंटों बैठे रहना भी हो सकता है नुकसानदायक

Long Working Hours लंबे समय तक ऑफिस में काम करने का एक बड़ा हिस्सा लगातार बैठे रहने में गुजरता है। शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर में कैलोरी खर्च कम हो सकती है और वजन बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और ब्लड लिपिड से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।

इसलिए केवल दिन में कुछ समय एक्सरसाइज करना पर्याप्त नहीं माना जाता। काम के बीच लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना और थोड़ी-थोड़ी देर में उठकर चलना भी जरूरी है।

नींद की कमी से भी बढ़ सकती है परेशानी

Long Working Hours देर रात तक काम करने और सुबह जल्दी उठने की वजह से अगर लगातार नींद पूरी नहीं हो रही है, तो इसका असर शरीर के साथ-साथ हृदय पर भी पड़ सकता है। नियमित रूप से पर्याप्त नींद न मिलने से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।

इसलिए व्यस्त शेड्यूल के बावजूद नींद को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वयस्कों को सामान्य तौर पर हर रात करीब 7-9 घंटे की नींद लेने का लक्ष्य रखना चाहिए।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

Long Working Hours लंबे वर्किंग आवर्स के बीच अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करके हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

  • हर 30-60 मिनट में कुछ देर के लिए अपनी सीट से उठें और चलें।
  • सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की एरोबिक एक्सरसाइज करने का प्रयास करें।
  • नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को भी दिनचर्या में शामिल करें।
  • रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लें।
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दें।
  • धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें।
  • समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
  • लगातार तनाव रहने पर काम और आराम के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश करें।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

Long Working Hours अगर लंबे समय तक काम करने के साथ सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी, अत्यधिक पसीना या चक्कर जैसे गंभीर लक्षण महसूस हों, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी बीमारी, लक्षण या व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के लिए डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

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