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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Dhanbad : झारखंड के धनबाद रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने वन्यजीव तस्करों की साजिश को नाकाम करते हुए दून एक्सप्रेस के जनरल कोच से 78 जीवित कछुए बरामद किए हैं। यह इस ट्रेन से कछुओं की बरामदगी की 13 दिनों के भीतर दूसरी बड़ी घटना है, जिससे रेलवे मार्गों के जरिए संचालित संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आरपीएफ का संयुक्त अभियान और लावारिस बैगों से बरामदगी

Dhanbad आरपीएफ के वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर विशेष टीम और सीआईबी (CIB) धनबाद ने ‘ऑपरेशन वाइलेप’ के तहत 11-12 सितंबर की रात धनबाद स्टेशन पर संयुक्त जांच अभियान चलाया। ऋषिकेश से हावड़ा जा रही ट्रेन संख्या 13010 दून एक्सप्रेस के इंजन से दूसरे जनरल कोच की जब सघन तलाशी ली गई, तो दो थैले और दो पिठ्ठू बैग लावारिस अवस्था में पाए गए। जब किसी भी यात्री ने उन बैगों पर अपना अधिकार नहीं जताया, तो गवाहों की उपस्थिति में उनकी जांच की गई, जिसमें से कुल 78 जीवित कछुए बाहर निकले।

संरक्षित ‘इंडियन फ्लैपशेल’ प्रजाति के हैं सभी कछुए

Dhanbad शुरुआती जांच में पाया गया कि बरामद सभी कछुए इंडियन फ्लैपशेल (Indian Flapshell) प्रजाति के हैं। यह प्रजाति ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972’ के तहत पूरी तरह से संरक्षित है। विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बरामद कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया गया है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, लेकिन आरपीएफ और वन विभाग सीसीटीवी फुटेज खंगालकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह खेप कहां से लोड की गई थी और इसे कहां भेजा जा रहा था।

13 दिन पहले भी बरामद हुए थे 120 कछुए

Dhanbad चिंताजनक बात यह है कि इससे पूर्व 29 अगस्त की रात भी दून एक्सप्रेस के महिला कोच से छह लावारिस बैगों में बंद 120 जीवित कछुए बरामद किए गए थे। लगातार दूसरी बार उसी ट्रेन से कछुओं की बरामदगी यह संकेत देती है कि तस्कर इस रूट का इस्तेमाल कर संरक्षित वन्यजीवों की अंतर्राज्यीय तस्करी कर रहे हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।

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