By: Ravindra Singh
Varaha Jayanti : सनातन धर्म में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक भगवान वराह का अवतार है, जिसे पृथ्वी की रक्षा और धर्म की स्थापना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।
2026 में कब मनाई जाएगी वराह जयंती?
Varaha Jayanti पंचांग के अनुसार, साल 2026 में वराह जयंती रविवार, 13 सितंबर को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और अगले दिन 14 सितंबर की सुबह 7:08 बजे तक रहेगी। इसी तिथि के आधार पर इस वर्ष वराह जयंती का पर्व 13 सितंबर को मनाया जाएगा।
वराह जयंती 2026 का शुभ पूजा मुहूर्त
Varaha Jayanti भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। 13 सितंबर को पूजा के लिए शुभ समय दोपहर 1:30 बजे से शाम 4 बजे तक माना गया है। भक्त इस अवधि में भगवान वराह की पूजा विधिपूर्वक कर सकते हैं।
वराह जयंती पर ऐसे करें भगवान वराह की पूजा
Varaha Jayanti वराह जयंती के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की पूजा का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान वराह की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
पूजा की आसान विधि
- पूजा स्थल पर एक कलश में स्वच्छ जल भरकर स्थापित करें।
- इसके ऊपर भगवान वराह की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
- भगवान वराह का पंचामृत से अभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद पीले वस्त्र, पीले फूल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित करें।
- पूजा के दौरान ‘ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
- धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु के वराह स्वरूप की आरती करें।
- अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करें।
भगवान विष्णु ने क्यों लिया था वराह अवतार?
Varaha Jayanti पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर ने अपनी शक्ति के बल पर तीनों लोकों में भय का वातावरण बना दिया था। उसके अत्याचार से देवता भी परेशान थे। मान्यता है कि हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में छिपा दिया था, जिससे सृष्टि का संतुलन प्रभावित होने लगा।
पृथ्वी को संकट से बाहर निकालने के लिए भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया। इसके बाद उन्होंने हिरण्याक्ष से युद्ध किया और उसका वध कर दिया। भगवान वराह ने समुद्र में जाकर पृथ्वी को बाहर निकाला और उसकी रक्षा की। इसी वजह से वराह अवतार को पृथ्वी के उद्धार और धर्म की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
वराह जयंती का धार्मिक महत्व
Varaha Jayanti वराह जयंती भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष अवसर मानी जाती है। इस दिन पूजा, मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक भगवान वराह की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि का दावा नहीं किया जाता है।
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