China LAC Troop DeploymentChina LAC Troop Deployment
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China LAC Troop Deployment;नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के सामने चीनी सेना यानी PLA की तैनाती में कमी दर्ज की गई। हालांकि, सैन्य मौजूदगी घटने के बावजूद सीमा पर चीन की क्षमता और बुनियादी ढांचे को देखते हुए खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी बातचीत से उत्तरी सीमा की स्थिति में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।

PLA की तैनाती में आई कमी

China LAC Troop Deployment;रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में उत्तरी सीमा की स्थिति का आकलन करते हुए बताया है कि 2025 में LAC से सटे क्षेत्रों और पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण इलाकों में PLA की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों क्षेत्रों में करीब 10-10 संयुक्त हथियार ब्रिगेड स्तर की सैन्य टुकड़ियों की तैनाती कम की गई है। एक संयुक्त हथियार ब्रिगेड में लगभग 5,000 सैनिक हो सकते हैं। इस आधार पर 10 ब्रिगेड का आंकड़ा करीब 50,000 सैनिकों के बराबर बैठता है, हालांकि LAC और प्रशिक्षण क्षेत्रों की तैनाती को अलग-अलग देखा जाता है।

सैनिक घटे, लेकिन सैन्य खतरा बरकरार

China LAC Troop Deployment;चीन द्वारा सैनिकों की संख्या में कमी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि LAC पर सैन्य चुनौती समाप्त हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अब भी सीमा के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में सैनिकों के साथ मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और टैंक जैसे सैन्य संसाधन बनाए हुए है।

पश्चिमी, मध्य और पूर्वी सेक्टरों में भारत को चीन की सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। चीन की ओर का भूभाग कई इलाकों में अपेक्षाकृत समतल पठारी है, जिससे सैनिकों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही भारतीय सीमा के मुकाबले कुछ परिस्थितियों में आसान हो सकती है।

इसी वजह से भारत के लिए LAC पर पर्याप्त सैन्य मौजूदगी और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बातचीत से सीमा पर आया सकारात्मक बदलाव

China LAC Troop Deployment;रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच जारी संवाद को भी अहम बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के साथ सैन्य स्तर पर संपर्क ने उत्तरी सीमा पर तनाव कम करने में भूमिका निभाई है।

अक्टूबर 2024 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तीन बार मुलाकात हो चुकी है। इसके अलावा अगस्त 2026 में भारत के विशेष प्रतिनिधि और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की थी।

इस बैठक में दोनों देशों ने अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई थी।

सीमा पर भारत ने भी बढ़ाई इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता

China LAC Troop Deploymentरक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में सीमा सड़क संगठन (BRO) की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। BRO की ओर से ऊंचाई वाले और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में सड़क, सुरंग और अन्य आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का काम जारी है।

रिपोर्ट में पूर्वी लद्दाख स्थित मुध-न्योमा एयरफील्ड के संचालन को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। करीब 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह एयरफील्ड LAC के नजदीक भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत के लिए सतर्कता अभी भी जरूरी

China LAC Troop Deployment;;रक्षा मंत्रालय के आकलन से स्पष्ट है कि LAC पर चीन की सैनिक तैनाती में कमी जरूर आई है, लेकिन उसकी सैन्य क्षमता और सीमा क्षेत्र में मौजूद बुनियादी ढांचा अभी भी मजबूत है।

ऐसे में भारत के लिए सैन्य तैयारियों, सीमा बुनियादी ढांचे और निगरानी क्षमता को लगातार मजबूत रखना महत्वपूर्ण है। सैनिकों की संख्या में कमी को सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन सीमा पर दीर्घकालिक रणनीतिक सतर्कता बनाए रखना जरूरी रहेगा।

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