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रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्‍तव

Jamshedpur : जमशेदपुर स्थित बिष्टुपुर के सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन आध्यात्मिक उल्लास छाया रहा। व्यासपीठ से कथावाचक हिमांशु महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का दिव्य वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर छप्पन भोग और श्री गोवर्धन महाराज की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई।

गोकुल के तीन उत्सवों की महिमा और प्रभु का विराट स्वरूप

Jamshedpur कथा व्यास ने ब्रजमंडल में मनाए जाने वाले जन्मोत्सव, नंदोत्सव और गोकुल उत्सव की आध्यात्मिक महिमा का बखान किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला के पीछे गहरा संदेश छिपा है। गोकुल में माता यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड का दर्शन कराकर प्रभु ने विराट स्वरूप प्रकट किया। इसके बाद माखन चोरी की लीलाओं के माध्यम से गोपियों के निश्छल और साक्षात प्रेम को जागृत किया।

गोवर्धन पर्वत धारण कर तोड़ा देवराज इंद्र का मान-मर्दन

Jamshedpur कथा के दौरान इंद्रदेव के अहंकार और गोवर्धन पूजा के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया गया। महाराज जी ने बताया कि जब श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा रुकवाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा कराई, तो क्रोधित होकर इंद्र ने लगातार सात दिनों तक मूसलाधार बारिश की। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान ने कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर लिया। अंततः इंद्र का अहंकार समाप्त हुआ और उन्होंने प्रभु के चरणों में क्षमा याचना की।

छप्पन भोग और महाप्रसाद के साथ उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Jamshedpur कार्यक्रम के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर ‘जय श्री राधे’ और श्रीकृष्ण के जयकारों से गुंजायमान रहा। यजमान परिवार संत कुमार-विजय कुमार अगीवाल, सत्यनारायण-अनुप अग्रवाल, मयूर संघी, उमेश-महेश संघी, हरिप्रसाद-अभिषेक अग्रवाल तथा संतोष-पुष्पा अग्रवाल ने मुख्य पूजन संपन्न किया। कथा के पश्चात सुरेश कुमार अगीवाल की ओर से आयोजित महाप्रसाद का वितरण हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

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