रिपोर्टर: सन्तोष सरावगी
Dabra : डबरा क्षेत्र के जंगीपुर गांव में बीते दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण एक मकान अचानक ढह गया। इस भीषण हादसे के वक्त घर में सो रहे दो बच्चों समेत कुल छह लोग मलबे में दब गए। घटना की सूचना मिलते ही अफरा-तफरी मच गई। मलबे में दबने से एक मासूम बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि इलाज के दौरान उसकी मां की भी मृत्यु की पुष्टि हुई। हादसे की खबर मिलते ही एसडीएम नवकिरण कौर, एसडीओपी सौरभ कुमार और सिटी थाना प्रभारी संजय शर्मा डबरा के सिविल अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
एंबुलेंस और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Dabra हादसे के बाद राहत कार्य में हुई देरी को लेकर स्थानीय लोगों और भीम आर्मी के जिला उपाध्यक्ष जिबलेश जाटव ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के तुरंत बाद 108 एंबुलेंस को फोन किया गया था, लेकिन आपातकालीन सेवा मौके पर नहीं पहुंची। आरोप है कि अस्पताल परिसर में ही एंबुलेंस खड़ी थी और उसका चालक सो रहा था, जिससे घायलों को समय पर मदद नहीं मिल सकी।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी और लापरवाही
Dabra अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम 6 बजे के बाद अस्पताल में जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौजूद नहीं रहते हैं। कई अधिकारी अपनी जिम्मेदारियां छोड़कर ग्वालियर लौट जाते हैं। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण आपातकालीन स्थिति में ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों को परिजनों के भारी विरोध का सामना करना पड़ता है और प्रशासनिक अधिकारियों को भी जवाब देना मुश्किल हो जाता है।
रेफरल सिस्टम और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
Dabra इस घटना ने डबरा के सिविल अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अस्पताल में गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज के लिए समुचित इंतजाम नहीं हैं। हर गंभीर मामले में मरीजों को तुरंत ग्वालियर रेफर कर दिया जाता है। सही समय पर प्राथमिक इलाज न मिलने और रास्ते में समय बीत जाने के कारण पहले भी कई मरीज ग्वालियर ले जाते वक्त रास्ते में ही दम तोड़ चुके हैं।
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