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40 लाख रुपये के भराव बजट के इस्तेमाल पर उठे सवाल, कलेक्टर ने खनिज विभाग को जांच के निर्देश दिए

खंडवा। शहर में नगर निगम की जमीन से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर मुरूम निकालकर निजी कॉलोनियों में पहुंचाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि ट्रांसपोर्ट नगर के भराव के लिए स्वीकृत मुरूम का इस्तेमाल निजी स्तर पर किया जा रहा है। मामले में नगर निगम के बजट और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

मौके पर मिली भारी मशीनरी

मामला सिहाड़ा रोड स्थित नगर निगम की जमीन का बताया जा रहा है। यहां कथित खनन स्थल पर दो जेसीबी, एक पोकलेन और करीब आठ डंपर के जरिए खुदाई और मुरूम की ढुलाई किए जाने की बात सामने आई है।

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने आरोप लगाया कि यहां से बड़ी संख्या में डंपरों के जरिए मुरूम निकालकर शहर की निजी कॉलोनियों में पहुंचाई जा रही थी। इंदौर रोड स्थित एक निजी कॉलोनी में मुरूम खाली किए जाने के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आने का दावा किया गया है।

ट्रांसपोर्ट नगर के भराव कार्य को लेकर सवाल

नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट नगर में प्लॉट आवंटन के बाद भराव कार्य के लिए नगर निगम की ओर से करीब 40 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। इस काम के लिए खनिज विभाग से अनुमति भी ली गई थी, जिसकी अवधि जून 2026 तक बताई जा रही है।

आरोप है कि अनुमति की अवधि समाप्त होने के बाद भी मुरूम का उत्खनन और परिवहन जारी रहा। इसके बाद अनुमति की अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है। मामले को लेकर सरकारी राजस्व, पर्यावरणीय नियमों और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने कलेक्टर ऋषव गुप्ता को शिकायत और संबंधित वीडियो-दस्तावेज सौंपे हैं। शिकायत के बाद कलेक्टर ने खनिज विभाग को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

खंडवा एडीएम के.आर. बडोले ने बताया कि प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लिया है। जांच के दौरान मौके पर किए जा रहे खनन की वैधता, मुरूम के परिवहन और उपयोग के साथ-साथ मशीनरी से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

प्रशासन के मुताबिक जांच में यदि नियमों का उल्लंघन या सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मुरूम का उत्खनन और परिवहन वैध था या नहीं।