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रिपोर्टर: प्रेम श्रीवास्‍तव

Jamshedpur : ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी (JOS) के तत्वावधान में साकची में रेटिना (आंखों के पर्दे) की जटिल बीमारियों और उनके आधुनिक चिकित्सा विकल्पों पर एक दिवसीय शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में शहर के कई प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ एकत्रित हुए और उन्होंने उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजेनेरेशन (AMD), मैकुलोपैथी एवं विट्रियोटेरिनल रोगों की पहचान और उनके नवीनतम इलाज के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श किया।

वरिष्ठ डॉक्टरों की देखरेख में हुआ सत्र का संचालन

Jamshedpur कार्यक्रम की शुरुआत JOS के सचिव डॉ. अजय कुमार गुप्ता के स्वागत संबोधन से हुई, जबकि अध्यक्षता डॉ. एस. पी. जाखनवाल ने की। सत्र के दौरान पैनलिस्ट के रूप में डॉ. कुमार साकेत और डॉ. शिवम मदान ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. आशा रानी प्रसाद, डॉ. सी.बी.पी. सिंह, डॉ. सिंघल, डॉ. मलय द्विवेदी, डॉ. रेणु पांडे, डॉ. राकेश, डॉ. आजम, डॉ. विवेक, डॉ. नितेश सिंह, डॉ. नीलुतपाल शर्मा और डॉ. देव समेत कई नामचीन नेत्र विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

विशेषज्ञों ने दिया धैर्यपूर्वक और दीर्घकालिक इलाज का सुझाव

Jamshedpur रांची के आइरिस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से आए मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष कुमार सिंह ने रेटिना से संबंधित समस्याओं के इलाज में मरीज के संयम को सबसे जरूरी पहलू बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेटिना की बीमारियों के उपचार में मरीजों को एक-दो महीने के अंतराल पर लगातार कई इंजेक्शन लगाने पड़ सकते हैं, जिसके लिए लंबे समय तक नियमित निगरानी अनिवार्य होती है।

शुरुआती निदान और अस्पताल के दौरों को कम करने पर ध्यान

Jamshedpur कोलकाता स्थित डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल के डॉ. कुमार सौरभ ने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी देते हुए बताया कि किस तरह उन्नत तकनीकों के जरिए इलाज को प्रभावी बनाते हुए मरीज के बार-बार अस्पताल आने के कष्ट और खर्च के बोझ को कम किया जा सकता है। सेमिनार के दौरान हुए इंटरैक्टिव सत्र में ऑकल्ट सीएनवीएम (CNVM) के समय पर निदान और नियोवैस्कुलर एएमडी के सटीक उपचार पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि रेटिना की बीमारियों में सही समय पर जांच और त्वरित इलाज शुरू करना ही दृष्टि हानि को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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