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रिपोर्टर: अभिषेक राजपूत

Kedarnath Yatra DDRF Rescue Operation : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा से लौट रहे एक श्रद्धालु के साथ बड़ा हादसा हो गया। पैदल मार्ग पर घोड़े से अचानक नियंत्रण खोने के कारण यात्री नीचे गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। घटना की भनक लगते ही आपदा प्रबंधन की रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाई और बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच घायल यात्री का सफल रेस्क्यू कर उन्हें समय पर अस्पताल पहुँचाया।

Kedarnath Yatra DDRF Rescue Operation गौरीकुंड के पास ‘छोड़ी’ नामक स्थान पर हुआ हादसा, राजस्थान के रहने वाले हैं पीड़ित

मिली जानकारी के अनुसार, सेक्टर मजिस्ट्रेट गौरीकुंड ने इस दुर्घटना की सूचना नियंत्रण कक्ष को दी थी। बताया गया कि राजस्थान के रहने वाले 53 वर्षीय तीर्थयात्री चम्पा लाल बाबा केदारनाथ के दर्शन करने के बाद वापस गौरीकुंड की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान पैदल मार्ग पर ‘छोड़ी’ नामक संकरे और दुर्गम स्थान के पास उनका घोड़ा अनियंत्रित हो गया, जिससे वे सीधे पत्थरों पर जा गिरे। इस हादसे में उन्हें काफी चोटें आईं और वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए।

Kedarnath Yatra DDRF Rescue Operation DDRF और YMF की टीमों ने स्ट्रेचर के सहारे पार किया दुर्गम पहाड़ी रास्ता

हादसे की खबर मिलते ही जिला आपदा रेस्क्यू फोर्स (DDRF) और यात्रा मार्ग पर तैनात वाईएमएफ (YMF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। रेस्क्यू टीम ने बिना वक्त गंवाए घायल चम्पा लाल को मौके पर ही प्राथमिक उपचार (First Aid) दिया। इसके बाद, खड़ी चढ़ाई और पथरीले रास्तों की परवाह न करते हुए जवानों ने पीड़ित को स्ट्रेचर पर लिटाया और कई किलोमीटर का पैदल सफर तय कर गौरीकुंड स्थित अस्पताल पहुंचाया।

Kedarnath Yatra DDRF Rescue Operation एंबुलेंस के जरिए सोनप्रयाग किया गया रेफर, यात्रा मार्ग पर सुरक्षा दल अलर्ट

गौरीकुंड अस्पताल में तैनात डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद यात्री की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की और पीड़ित को आगे के इलाज के लिए सोनप्रयाग के बड़े चिकित्सालय भेजा, जहाँ फिलहाल उनका उपचार जारी है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

सुरक्षा नोट: चारधाम यात्रा और विशेषकर केदारनाथ के पैदल मार्ग पर बदलते मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन दल (SDRF/DDRF) हर मोड़ पर मुस्तैद हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में श्रद्धालुओं को तुरंत मेडिकल और रेस्क्यू सहायता मिल सके।

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