रिपोर्टर: ईशु प्रसाद
Kochi Maradu Flat Scam : केरल के कोच्चि में तटीय नियामक क्षेत्र (CRZ) के नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए मराडू अवैध अपार्टमेंट निर्माण मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक पूर्व माकपा (CPI-M) नेता व पंचायत अध्यक्ष, आर्किटेक्ट, तीन नामी बिल्डर्स और तत्कालीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। यह कार्रवाई उन फ्लैट मालिकों की शिकायतों पर की गई है, जिन्हें नियमों की अनदेखी कर ठगा गया था।
Kochi Maradu Flat Scam तटीय नियमों का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश
यह पूरा मामला कोच्चि की वेम्बानाड झील के तट पर बनी बहुमंजिला इमारतों से जुड़ा है। जनवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक आदेश के बाद ‘अल्फा सरीन’ के ट्विन टावर, ‘एच2ओ होली फेथ’ और ‘जैन कोरल कोव’ नाम के आलीशान अपार्टमेंट परिसरों को नियंत्रित विस्फोट (Controlled Implosion) के जरिए ढहा दिया गया था। शीर्ष अदालत ने पाया था कि इन इमारतों का निर्माण पर्यावरण और तटीय नियामक क्षेत्र (CRZ) के नियमों का सरेआम उल्लंघन करके किया गया था।
Kochi Maradu Flat Scam राजनीतिक नेतृत्व और सरकारी अमले की मिलीभगत का भंडाफोड़
क्राइम ब्रांच सेंट्रल यूनिट-2 के पुलिस उपाधीक्षक टॉमी सेबस्टियन द्वारा मूवाट्टुपुझा की सतर्कता (Vigilance) अदालत में दाखिल चार्जशीट में कई बड़े नामों को आरोपी बनाया गया है। इसमें वर्ष 2005 से 2010 के बीच मराडू पंचायत के अध्यक्ष रहे माकपा नेता के. ए. देवसी, पूर्व पंचायत सचिव एम. मुहम्मद अशरफ, पूर्व कनिष्ठ अधीक्षक पी. ई. जोसेफ (जिनका निधन हो चुका है) और पूर्व उच्च श्रेणी लिपिक आर. जयराम नाइक शामिल हैं। इसके अलावा अल्फा सरीन के एमडी पॉल राज जोसेफ, आर्किटेक्ट के. सी. जॉर्ज, एच2ओ होली फेथ के एमडी सानी फ्रांसिस और जैन कोरल कोव के संदीप मेहता व उनके सहयोगी सी. नवीन को भी नामजद किया गया है।
Kochi Maradu Flat Scam धोखाधड़ी, साजिश और पद के दुरुपयोग की गंभीर धाराएं
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सबूतों को नष्ट करने व छिपाने की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। तत्कालीन सरकारी अधिकारियों पर लोक सेवक रहते हुए पद के दुरुपयोग और वित्तीय लाभ के लिए शक्तियों का गलत इस्तेमाल करने के अतिरिक्त आरोप हैं। चार्जशीट में कहा गया है कि बिल्डरों ने यह बात छिपाई कि निर्माण कार्य ‘नो डेवलपमेंट जोन’ में हो रहा था। उन्होंने राजनीतिक रसूख और अधिकारियों से सांठगांठ कर पर्यावरण मंत्रालय या केरल तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (KCZMA) से जरूरी मंजूरी लिए बिना ही अवैध रूप से बिल्डिंग परमिट हासिल कर लिए थे।
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