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रिपोर्टर: ईशु प्रसाद

Kannur : केरल के कन्नूर और कासरगोड जिलों में मंगलवार (9 जून, 2026) को लगातार हो रही भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कन्नूर में जहां एक पुरानी इमारत का एक हिस्सा व्यस्त सड़क पर गिर गया, वहीं कासरगोड में अभी डेढ़ महीने पहले ही बनी एक नई सड़क पर करीब 50 मीटर लंबी गहरी दरार आ गई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

Kannur: व्यस्त सड़क पर ढही पुरानी इमारत, बाल-बाल बचे लोग

कन्नूर के तलाप में एलआईसी (LIC) रोड पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण एक पुरानी खपरैल वाली इमारत का पिछला हिस्सा और उसकी बाउंड्री वॉल अचानक सड़क पर ढह गई। यह हादसा डीसीसी (DCC) कार्यालय और माकपा (CPI-M) जिला समिति कार्यालय के बीच स्थित एक पॉकेट रोड पर हुआ। गनीमत यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत या घायल नहीं हुआ।

जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय इमारत में चलने वाला सर्विस सेंटर बंद था और ऊपरी मंजिल पर रहने वाले प्रवासी मजदूर भी बाहर थे। जिला अग्निशमन एवं बचाव सेवा अधिकारी अरुण भास्कर के नेतृत्व में टीम ने मलबे को हटाकर यह सुनिश्चित किया कि कोई नीचे दबा न हो। कन्नूर की मेयर पी. इंदिरा ने घटनास्थल का दौरा कर बताया कि मानसून से पहले ही जर्जर इमारतों के मालिकों को नोटिस दिए गए थे, लेकिन अदालती स्थगन आदेशों (Stay Orders) के कारण कार्रवाई में देरी होती है। अब इमारत के बाकी खतरनाक हिस्से को गिराने की तैयारी की जा रही है।

Kannur कासरगोड: उद्घाटन के डेढ़ महीने बाद ही धंसी नई सड़क

दूसरी तरफ, कासरगोड के कुंदमकुझी में पोइनाची-बांदाडुका मार्ग पर थन्नियादी-थदियमवलप्पु मैकाडम रोड पर भारी बारिश के बाद लगभग 50 मीटर लंबी एक बड़ी दरार आ गई। यह सड़क केवल डेढ़ महीने पहले ही जनता के लिए खोली गई थी, जो अब बारिश के कारण एक तरफ से आंशिक रूप से धंस गई है और उसकी सुरक्षा दीवार (Retaining Wall) बाहर की तरफ फूल गई है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण के दौरान मिट्टी को ठीक से दबाया (Compacted) नहीं गया था और सड़क की नींव को मजबूत करने में लापरवाही बरती गई। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि ठेकेदार द्वारा दरार को सीमेंट के मिश्रण से छिपाने की कोशिश की गई थी, लेकिन तेज बारिश में वह बह गया।

Kannur सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश और जांच की मांग

सड़क के धंसने से हादसों के खतरे, विशेषकर भारी वाहनों के पलटने की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने खुद ही सोमवार शाम को क्षतिग्रस्त हिस्से के चारों ओर बैरिकेड्स लगा दिए और यातायात को सीमित कर दिया।

सालों की सार्वजनिक मांग के बाद इस 1.4 किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा और पक्का किया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर इतनी गंभीर ढांचागत खराबी आने के बाद अब स्थानीय लोग इस निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच और तुरंत मरम्मत की मांग कर रहे हैं ताकि राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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