रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Panchkula : हरियाणा के पंचकूला जिले से जुड़े राज्य के सबसे पुराने और बड़े भूमि विवादों में से एक में नया मोड़ आ गया है। अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने एक ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए 1394 एकड़ बेशकीमती जमीन के मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है। कमिश्नर ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनकर अगले दो महीने के भीतर इस पर नए सिरे से अंतिम निर्णय लिया जाए।
Panchkula 1960 के दशक से चल रही है कानूनी लड़ाई, सात गांवों की जमीन शामिल
यह पूरा कानूनी विवाद दिवंगत जमींदार सरदार भगवंत सिंह की विशाल संपत्ति के मालिकाना हक और उसके सही मूल्यांकन से जुड़ा हुआ है। 1960 के दशक से चला आ रहा यह ऐतिहासिक जमीन विवाद पंचकूला क्षेत्र के सात प्रमुख गांवों—बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर और बीर फिरोजारी—में फैली कुल 1394 एकड़ बेहद कीमती जमीन को अपने दायरे में लेता है।
इस अंतहीन खींचतान की मुख्य वजह सरदार भगवंत सिंह के निधन के बाद उनकी ‘अधिशेष’ (सरप्लस) भूमि का सही और कानूनी रूप से सटीक निर्धारण न हो पाना है, जिसे लेकर पिछले छह दशकों से विभिन्न अदालतों में मुकदमेबाजी चल रही है।
अगर इस जमीन की मौजूदा स्थिति की बात करें, तो वर्तमान में यह पूरी भूमि जीटी रोड के समीप स्थित है और फिलहाल आईटीबीपी (ITBP) के नियंत्रण में है; हालांकि इस संवेदनशील और जटिल मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी प्रशासन को एक साल की तय समयसीमा के भीतर इस अधिशेष भूमि का नए सिरे से पुनर्निर्धारण करने का कड़ा और समयबद्ध निर्देश जारी कर चुका है।
Panchkula सरकारी बनाम निजी दावेदारों का पेंच: 583 एकड़ पहले से सरकारी खाते में
राजस्व विभाग (Revenue Department) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशाल भूखंड के मालिकाना हक को लेकर स्थिति बेहद पेचीदा बनी हुई है, क्योंकि कुल भूमि में से 583 एकड़ से ज्यादा जमीन पहले ही राज्य सरकार के नाम दर्ज की जा चुकी है, जबकि लगभग 810 एकड़ जमीन वर्तमान में अलग-अलग निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज है।
इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें बिल्कुल विपरीत हैं; एक तरफ जहाँ देहरादून की रहने वाली आशा सिंह ने कलेक्टर के एक पुराने फैसले को चुनौती देते हुए अपनी दावेदारी पेश की है, वहीं दूसरी तरफ जमीन खरीदने वाले निजी पक्षों का पुरजोर दावा है कि वे दशकों से इस भूमि के वैध खरीदार हैं और राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में उनका नाम बकायदा दर्ज है, जिसे बदलने का कानूनी अधिकार प्रशासन के बजाय सिर्फ और सिर्फ सिविल कोर्ट के पास सुरक्षित है।
Panchkula कमिश्नर ने जताई नाराजगी, कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को दो महीने का अल्टीमेटम
अंबाला के मंडलायुक्त संजीव वर्मा ने इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट और समयबद्ध आदेशों के बावजूद यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और ढुलमुल रवैये के कारण अनावश्यक रूप से खिंचता चला गया। उन्होंने अपने अंतिम आदेश में साफ किया कि अधिशेष भूमि का मूल्यांकन पूरी होल्डिंग (पूरी जमीन) को एक इकाई मानकर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, बची हुई 811 एकड़ भूमि को राज्य सरकार के नाम स्थानांतरित करने के सवाल पर भी नए सिरे से विचार किया जाएगा। दो महीने के भीतर आने वाले इस नए फैसले पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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