New Delhi : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में तेजी से पैर पसार रहे इबोला वायरस के प्रकोप को देखते हुए ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक के अनुसार, यह फैसला इस घातक वायरस के एक नए और अधिक चुनौतीपूर्ण स्ट्रेन के सीमा पार फैलने और तेजी से बढ़ते मामलों के बाद लिया गया है। इस घोषणा के साथ ही अफ्रीका महाद्वीप और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है।
New Delhi बूंदीबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन का कहर और बढ़ता खतरा
इस बार इबोला का जो प्रकोप देखा जा रहा है, वह इबोला वायरस के ‘बूंदीबुग्यो’ (Bundibugyo) स्ट्रेन के कारण है।
- बढ़ते मामले और मौतें: कांगो (DRC) के इतूरी प्रांत से शुरू हुआ यह संक्रमण अब तेजी से अन्य क्षेत्रों और पड़ोसी देश युगांडा की राजधानी कंपाला तक पहुंच चुका है। अब तक सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। The Guardian
- स्वास्थ्य कर्मियों पर हमला: प्रभावित इलाकों में कई स्वास्थ्य कर्मियों की भी इस वायरस की चपेट में आने से मौत हुई है, जिसने अस्पतालों के भीतर संक्रमण फैलने (अस्पताल-जनित ट्रांसमिशन) की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
- भौगोलिक विस्तार: कांगो के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों जैसे दक्षिण सूडान और युगांडा में बड़े पैमाने पर लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों के कारण इस वायरस के और अधिक फैलने का जोखिम अत्यधिक उच्च स्तर पर है।
New Delhi बिना वैक्सीन और इलाज के बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति
यह नया प्रकोप स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण इसलिए बना हुआ है क्योंकि यह इबोला के आम तौर पर पाए जाने वाले ‘जायरे’ (Zaire) स्ट्रेन से बिल्कुल अलग है।
- दवा और टीके का अभाव: वर्तमान में बूंदीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ कोई भी स्वीकृत (Approved) वैक्सीन या सटीक एंटीवायरल थेरेपी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों का इलाज केवल उनके लक्षणों को नियंत्रित करके किया जा रहा है।
- संक्रमण का तरीका: इबोला हवा से नहीं फैलता, बल्कि यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ (जैसे रक्त, उल्टी, पसीना) या उनसे दूषित सतहों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसका इनक्यूबेशन पीरियड (लक्षण दिखने का समय) 2 से 21 दिनों का होता है।
New Delhi भारत सरकार की एडवाइजरी और सुरक्षात्मक कदम
डब्ल्यूएचओ की इस आपातकालीन घोषणा के बाद भारत सरकार भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं।
- यात्रा न करने की सलाह: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों को कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सख्त सलाह (Advisory) दी है। इन देशों में रह रहे भारतीयों को स्थानीय स्वास्थ्य नियमों का पालन करने को कहा गया है।
- भारत में जोखिम का स्तर: भारतीय विशेषज्ञों और एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों के अनुसार, भारत में फिलहाल पैनिक (डर) की कोई स्थिति नहीं है क्योंकि यह वायरस कोरोना की तरह श्वसन बूंदों (Respiratory Droplets) से नहीं फैलता। हालांकि, देश की प्रयोगशालाएं और आईसीएमआर (ICMR) नेटवर्क किसी भी संदिग्ध मामले की आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच और एयरपोर्ट सर्विलांस के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

