नई दिल्ली/जयपुर | भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे साहसिक अभियानों में से एक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल पूरा हो गया है। इस अवसर पर पूर्व सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि भारत के आक्रामक रुख और सटीक प्रहार से पाकिस्तान इस कदर घबरा गया था कि उसने खुद संपर्क कर सैन्य कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। जनरल घई के अनुसार, यह ऑपरेशन भारत की ‘सेल्फ-डिफेंस’ नीति में आए क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है।
पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 आतंकी कैंपों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ऑपरेशन की सफलता का विवरण साझा करते हुए बताया कि भारतीय जांबाजों ने सीमा पार लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के 9 प्रमुख लॉन्च पैड्स को पूरी तरह जमींदोज कर दिया था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक खूंखार आतंकवादी मारे गए थे। सिर्फ आतंकी ठिकाने ही नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना और थल सेना ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के 11 रणनीतिक एयरफील्ड को भी निशाना बनाया, जिससे दुश्मन का डिफेंस सिस्टम पूरी तरह पंगु हो गया था।
‘आत्मनिर्भर भारत’ की मिसाइलों ने दिखाई अपनी असली ताकत
पूर्व DGMO ने इस बात पर जोर दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ स्वदेशी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ महज एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि धरातल पर एक घातक हथियार है। इस ऑपरेशन के दौरान:
- स्वदेशी मिसाइलें: ब्रह्मोस (BrahMos) और आकाश (Akash) मिसाइल प्रणालियों का सटीक इस्तेमाल किया गया।
- प्रिसिजन स्ट्राइक: कुल 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की गईं, जिनमें से 7 सेना और 2 वायुसेना ने अंजाम दीं।
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: भारतीय तकनीक ने दुश्मन के रडार और संचार व्यवस्था को जाम कर दिया था, जिससे भारत का एक भी मिलिट्री एसेट प्रभावित नहीं हुआ।
जब ‘लाचार’ होकर पाकिस्तान ने मांगा था संघर्ष विराम
जनरल घई ने खुलासा किया कि ऑपरेशन के दौरान जब भारत ने जमीन, हवा और समुद्र—तीनों मोर्चों से दबाव बनाया, तो पाकिस्तान पूरी तरह असहाय हो गया। 10 मई की उस तारीख का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के DGMO ने खुद भारत से संपर्क किया और ‘युद्ध जैसी स्थिति’ को रोकने का अनुरोध किया। भारत ने बेहद नियंत्रित और जिम्मेदार तरीके से जवाब देते हुए अपनी संप्रभुता सुनिश्चित की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की सुरक्षा नीति की एक शुरुआत मात्र है, अंत नहीं।
