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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Gwalior : मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने एक संविदा कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायालय ने नगरपालिका के संविदा कर्मचारी राघवेंद्र शर्मा को बड़ी कानूनी सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने प्रशासन द्वारा उनके विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज करने के लिए जारी किए गए हालिया निर्देश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

Gwalior क्या है पूरा मामला और न्यायालय का हस्तक्षेप?

यह मामला नगरपालिका के संविदा कर्मचारी राघवेंद्र शर्मा से जुड़ा है, जिनके विरुद्ध विभागीय या प्रशासनिक कारणों से 22 अप्रैल 2026 को एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने पाया कि तत्काल राहत की आवश्यकता है, अन्यथा याचिकाकर्ता के करियर और मान-सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।

Gwalior कोर्ट का अंतरिम आदेश: दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है:

“अगली सुनवाई तक, दिनांक 22/04/2026 के विवादित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का निर्देश स्थगित रहेगा।”

इस आदेश के बाद अब पुलिस या संबंधित विभाग याचिकाकर्ता राघवेंद्र शर्मा के खिलाफ उस विशिष्ट आदेश के आधार पर कोई भी फौजदारी कार्यवाही नहीं कर सकेगा। यह आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा, जिससे कर्मचारी को अपना पक्ष मजबूती से रखने का समय मिल गया है।

Gwalior अगली सुनवाई और भविष्य की दिशा

ग्वालियर खंडपीठ ने इस कानूनी विवाद की अगली सुनवाई के लिए 11 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह की समय-सीमा निर्धारित की है। तब तक के लिए याचिकाकर्ता को किसी भी प्रकार की दंडात्मक या दमनकारी पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा मिल गई है। इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों, विशेषकर संविदा पर कार्यरत कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण न्यायिक संरक्षण के रूप में देखा जा रहा है।

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