रिपोर्टर: अरविन्द सिंह
Gwalior : मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे निरंतर अभियानों के बाद भी सरकारी कर्मचारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर कलेक्ट्रेट का है, जहाँ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार के रीडर को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी रीडर एक आवेदक को जमीन के नामांतरण (म्युटेशन) के लिए पिछले एक साल से दफ्तर के चक्कर कटवा रहा था। परेशान होकर जब पीड़ित ने इसकी शिकायत दर्ज कराई, तो ईओडब्ल्यू ने जाल बिछाकर भ्रष्ट कर्मचारी को रंगे हाथ दबोच लिया।
Gwalior कलेक्ट्रेट परिसर में अचानक EOW की दबिश, मच गया हड़कंप
गुरुवार को ग्वालियर कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हड़कंप और सनसनी फैल गई, जब अचानक वहाँ ईओडब्ल्यू (EOW) की विशेष टीम दाखिल हुई। लोग अभी कुछ समझ ही पाते कि टीम सीधे नायब तहसीलदार वृत्त गोशपुरा, डॉ. रमाशंकर सिंह के शासकीय कक्ष में जा घुसी। टीम ने वहां मौजूद रीडर अनिल कुटवारिया को आवेदक जितेंद्र पांडे से 20 हजार रुपये की रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए मौके पर ही रंगे हाथ दबोच लिया। इसके बाद कलेक्ट्रेट के अन्य विभागों में भी खलबली मच गई।
Gwalior पीड़ित की आपबीती: सालभर से हो रहा था परेशान, दो बार निरस्त की फाइल
अवैध वसूली का शिकार हुए आवेदक जितेंद्र पांडे ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्होंने अपना एक प्लॉट अपनी बुआ को बेचा था, जिसकी बकायदा रजिस्ट्री 16 जुलाई 2025 को की गई थी। इसके बाद भूखंड के नामांतरण की फाइल दफ्तर पहुंची थी।
जितेंद्र पांडे के अनुसार:
“रीडर अनिल कुटवारिया मुझे सालभर से लगातार प्रताड़ित कर रहा था। उसने बिना किसी ठोस वजह के मेरी फाइल को दो बार निरस्त भी कर दिया था। जब मैंने बार-बार फाइल खारिज करने का कारण पूछा, तो रीडर ने सीधे 50 हजार रुपये की रिश्वत की डिमांड रख दी। काफी मिन्नतें करने के बाद वह 40 हजार रुपये लेने पर राजी हुआ। इसके बाद मैंने भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय इसकी शिकायत ईओडब्ल्यू से करने का फैसला किया।”
Gwalior जाल बिछाकर की गई कार्रवाई, भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज
इस सफल ट्रैप कार्रवाई को लेकर ईओडब्ल्यू के डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आवेदक जितेंद्र पांडे ने बुधवार (10 जून) को ही ईओडब्ल्यू एसपी कार्यालय में एक लिखित आवेदन दिया था, जिसमें नायब तहसीलदार के रीडर द्वारा रिश्वत मांगे जाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने बताया:
“शिकायत मिलते ही मामले की गोपनीय जांच ईओडब्ल्यू निरीक्षक मदन मोहन मालवीय को सौंपी गई थी। जांच के दौरान जैसे ही रिश्वत मांगे जाने के पुख्ता डिजिटल और मौखिक प्रमाण मिले, टीम ने तुरंत एक्शन प्लान तैयार किया। गुरुवार को तय रणनीति के तहत कलेक्ट्रेट में छापा मारकर रीडर अनिल कुटवारिया को 20,000/- रुपये नकद घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।”
फिलहाल, ईओडब्ल्यू की टीम ने आरोपी रीडर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और कलेक्ट्रेट दफ्तर में आगे की कागजी कार्रवाई व पूछताछ जारी है।

