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Report by: Yogendra Singh

Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के वीआईपी क्षेत्र में स्थित ‘करेंसी टावर’ में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। सोमवार सुबह एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया, जहाँ एक महिला आईएएस (IAS) अधिकारी लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण फंस गईं। अधिकारी करीब 20 मिनट तक लिफ्ट के भीतर बंद रहीं, जिससे वहां हड़कंप मच गया। इस घटना ने शहर की बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Raipur न अलार्म, न हेल्पलाइन: लिफ्ट बनी ‘लोहे का डिब्बा’

जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार सुबह करीब 6 बजे की है। जब महिला अधिकारी लिफ्ट का उपयोग कर रही थीं, तभी वह बीच में ही अटक गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आपातकालीन स्थिति के लिए लिफ्ट में न तो कोई ‘इमरजेंसी अलार्म’ काम कर रहा था और न ही कोई हेल्पलाइन नंबर वहां चस्पा था। बिना किसी संचार माध्यम के, बंद लिफ्ट के भीतर 20 मिनट तक फंसे रहना किसी भी व्यक्ति के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तनावपूर्ण हो सकता है।

Raipur सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही

करेंसी टावर जैसी महत्वपूर्ण व्यावसायिक और आवासीय इमारत में इस तरह की बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं का अभाव प्रबंधन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। नियमानुसार, हर लिफ्ट में एआरडी (Automatic Rescue Device) और अलार्म सिस्टम का चालू होना अनिवार्य है। लेकिन यहाँ सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर लिफ्ट का संचालन किया जा रहा था। यदि कोई आम नागरिक या बुजुर्ग इस स्थिति में फंसता, तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते थे।

Raipur दोषियों पर कार्रवाई की मांग और भविष्य की चेतावनी

इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और अधिकारियों में भारी नाराजगी है। मांग की जा रही है कि बिल्डिंग के मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर की ऊंची इमारतों में लिफ्ट का ऑडिट समय-समय पर होना चाहिए। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय, ऐसी तकनीकी खामियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए।

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