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Report by: Yogendra Singh

Ujjain : बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन, जो अपनी आध्यात्मिक और शैक्षणिक विरासत के लिए विश्वविख्यात है, वहां के एक प्रतिष्ठित संस्थान से मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अनुशासन के नाम पर एक मासूम छात्र के साथ की गई बर्बरता ने न केवल शिक्षा जगत को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि आवासीय संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

अनुशासन के नाम पर हैवानियत: क्या यही है गुरु-शिष्य परंपरा?

Ujjain यह घटना चिंतामन गणेश मंदिर मार्ग पर स्थित भारत सरकार के अधीन संचालित ‘महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या संस्थान’ की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक विचलित करने वाले वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक शिक्षक, छात्र की चीखों को अनसुना कर उस पर डंडे बरसा रहा है। आरोपी शिक्षक की पहचान दत्तदास शेवड़े के रूप में हुई है, जो संस्थान में सामवेद राणायनी शाखा में शिक्षक होने के साथ-साथ वार्डन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस “खौफनाक सजा” के पीछे की वजह सिर्फ इतनी थी कि छात्र अपने बिस्तर के बजाय दूसरे के बिस्तर पर सो गया था।

कैमरे में कैद हुई वार्डन की क्रूरता

Ujjain घटना के समय कमरे में मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी प्रताड़ना का वीडियो गुपचुप तरीके से अपने मोबाइल में कैद कर लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मासूम बच्चा रहम की भीख मांग रहा है और दर्द से तड़प रहा है, लेकिन वार्डन महोदय का दिल नहीं पसीजा। शनिवार को जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, पूरे शहर में आक्रोश फैल गया। विडंबना यह है कि वीडियो वायरल होने और चौतरफा निंदा के बावजूद संस्थान प्रबंधन की ओर से अब तक कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आया है। अधिकारियों का तर्क है कि छुट्टी होने के कारण संपर्क नहीं हो सका, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है।

प्रतिष्ठित संस्थान की साख पर लगा गहरा दाग

Ujjain महर्षि सांदीपनी संस्थान एक ऐसा केंद्र है जहाँ देशभर से छात्र वेदों और शास्त्रों की शिक्षा लेने आते हैं। यहाँ की दिनचर्या ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होकर अत्यंत अनुशासित मानी जाती है। लेकिन, शिक्षा के इस पावन मंदिर में छात्र के साथ हुआ यह व्यवहार प्राचीन गुरुकुल परंपरा का अपमान है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि अनुशासन का अर्थ शारीरिक प्रताड़ना कदापि नहीं हो सकता। इस घटना ने उन हजारों माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है जिन्होंने अपने बच्चों को वैदिक शिक्षा के लिए यहाँ भेजा है। अब मांग की जा रही है कि आरोपी शिक्षक के खिलाफ न केवल विभागीय बल्कि सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाए।

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