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Report by: Yogendra Singh

Narsinghpur : जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली प्राचीन सिंगरी नदी को उसका पुराना स्वरूप लौटाने के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का शंखनाद हो गया है। इस अभियान की कमान खुद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने संभाली है। शनिवार को मंत्री पटेल ने न केवल अभियान का शुभारंभ किया, बल्कि स्वयं नदी की तलहटी में उतरकर फावड़ा चलाया और श्रमदान कर नागरिकों को जल संरक्षण का संदेश दिया।

विरासत को बचाने की पहल: नदी सिर्फ जल स्रोत नहीं, हमारी धरोहर

Narsinghpur अभियान के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री प्रह्लाद पटेल भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि सिंगरी नदी नरसिंहपुर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा:

“जल संरक्षण केवल सरकार की फाइल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, यह हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। अपनी धरोहर को स्वच्छ और अविरल बनाना हम सबका सामूहिक धर्म है।”

मंत्री ने स्थानीय युवाओं और गणमान्य नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान को एक ‘जन-आंदोलन’ का रूप दें और नियमित रूप से श्रमदान कर नदी की सफाई में योगदान दें।

बजट की बाधा नहीं आएगी: विधायक निधि से भी मिलेगा सहयोग

Narsinghpur नदी के कायाकल्प को लेकर वित्तीय चिंताओं पर विराम लगाते हुए मंत्री पटेल ने बड़े सहयोग का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पुनीत कार्य में धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। सरकारी बजट के प्रावधानों के अलावा, यदि आवश्यकता पड़ी तो वे अपनी विधायक निधि से भी अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराएंगे। इस राशि का प्राथमिक उपयोग नदी के गहरीकरण और जलधारा को पुनर्जीवित करने के लिए किया जाएगा।

कायाकल्प का मास्टर प्लान: गहरीकरण से हरित पट्टी तक

प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दौरान नदी पुनर्जीवन का चरणबद्ध रोडमैप साझा किया, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • अतिक्रमण हटाना: नदी क्षेत्र में किए गए सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमण को चिन्हित कर हटाया जाएगा।
  • व्यापक गहरीकरण: जलभराव की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनों और जन-सहयोग से नदी की तलहटी को गहरा किया जाएगा।
  • हरित पट्टी (Green Belt): नदी के दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण किया जाएगा ताकि भूजल स्तर में सुधार हो और पर्यावरण का संतुलन बना रहे।
  • प्रदूषण नियंत्रण: नदी में गिरने वाले नालों और गंदगी को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए ‘संजीवनी’

Narsinghpur इस अभियान में प्रशासनिक अमले के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भी हिस्सा लिया। ग्रामीणों और शहरवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘संजीवनी’ करार दिया है। लोगों का मानना है कि यदि सिंगरी नदी फिर से अपनी पुरानी रफ़्तार में लौटती है, तो जिले के जल संकट का स्थाई समाधान हो सकेगा।

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