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Report by: Ravindra Singh

New Delhi : शनिवार को समूचे भारत में ईद-उल-फितर का त्योहार अकीदत, उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। एक महीने के पवित्र रमजान के उपवास के समापन पर मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी। इस खास मौके पर देश के शीर्ष नेतृत्व और प्रमुख राजनीतिक दिग्गजों ने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संदेश: सेवा और भाईचारे पर जोर

New Delhi देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी नागरिकों को बधाई देते हुए ईद को आत्मसंयम और वंचितों के प्रति दया भाव रखने वाला पर्व बताया। उन्होंने आह्वान किया कि इस पावन अवसर पर सभी नागरिक समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाने का संकल्प लें।

New Delhi वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी के उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने अपने संदेश में आशा व्यक्त की कि यह दिन चारों ओर भाईचारे, शांति और दयालुता की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।

विपक्ष के नेताओं ने साझा की खुशियां

New Delhi विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने भी इस त्योहार को देश की साझा संस्कृति का प्रतीक बताते हुए बधाई दी:

  • राहुल गांधी: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने सभी के जीवन में समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हुए ईद की शुभकामनाएं दीं।
  • अखिलेश यादव: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ‘ईद मिलन’ समारोह की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ईद का मिलन समाज में शांति और खुशहाली का संचार करता है।

मायावती ने याद दिलाया संवैधानिक अधिकार

New Delhi बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम परिवारों को रमजान के सफल समापन पर बधाई देते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान का जिक्र किया। मायावती ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को जिस सम्मानजनक जिंदगी की गारंटी दी है, वह सभी को प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से आपसी मेलजोल और सहनशीलता की गौरवशाली परंपरा को बनाए रखने की अपील की।

प्रमुख हस्तियों की शुभकामनाओं के मुख्य अंश

नेतामुख्य संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूआत्मसंयम और वंचितों के प्रति दया का पर्व।
पीएम नरेंद्र मोदीभाईचारे और दयालुता की भावना प्रगाढ़ हो।
राहुल गांधीसभी के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आए।
मायावतीसंवैधानिक अधिकारों और सहनशीलता पर जोर।

यह त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि इसने भारतीय लोकतंत्र की ‘विविधता में एकता’ की तस्वीर को भी मजबूती से पेश किया।

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