West Asia Crisis : मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय शांति के लिए अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। गुरुवार को पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से टेलीफोन पर विस्तार से बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र 28 फरवरी के बाद से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बिगड़ते हालात और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करना रहा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: सुरक्षित नौवहन और वैश्विक व्यापार पर जोर
West Asia Crisis बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने ओमान के सुल्तान के साथ इस बात पर सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत और ओमान दोनों की साझा प्राथमिकता है। भारत ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है।
ओमान के सुल्तान और मलेशियाई पीएम के साथ कूटनीतिक संवाद
West Asia Crisis प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से जानकारी दी कि उन्होंने ओमान के सुल्तान और मलेशियाई प्रधानमंत्री को ईद-उल-फितर की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। शुभकामनाओं के साथ-साथ गंभीर भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई:
- ओमान के साथ: पीएम मोदी ने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के सम्मान को दोहराया। दोनों नेताओं ने माना कि हिंसा का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। मोदी ने संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों के लिए ओमान की सराहना की।
- मलेशिया के साथ: प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ चर्चा में खाड़ी क्षेत्र की वर्तमान स्थिति को ‘गंभीर’ बताया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तनाव कम करने के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की आवश्यकता है।
क्षेत्रीय शांति के लिए पीएम मोदी का सक्रिय नेतृत्व
West Asia Crisis 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से पीएम मोदी लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में हैं। ओमान के सुल्तान के साथ यह उनकी दूसरी महत्वपूर्ण बातचीत थी। भारत इस संकट में एक संतुलित मध्यस्थ और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
प्रधानमंत्री अब तक केवल ओमान या मलेशिया ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, इजरायल, ईरान, जॉर्डन, यूएई और बहरीन के शीर्ष नेतृत्व के साथ भी संपर्क साध चुके हैं। भारत का रुख स्पष्ट है—युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, और बातचीत की मेज पर वापसी ही एकमात्र रास्ता है।
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