Report by: Yogendra Singh
Bhopal : झीलों की नगरी भोपाल के सांस्कृतिक गलियारों में एक बार फिर सुरों का जादू बिखरा। अवसर था “अनुराग स्वर शाला” द्वारा आयोजित एक भव्य संगीत समारोह का, जिसका गवाह बना रवीन्द्र भवन का प्रतिष्ठित अंजनी हॉल। 16 मार्च 2026 की शाम भोपाल के संगीत प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। यह गरिमामय आयोजन स्वर्गीय शुभा श्रीवास्तव की स्मृति में समर्पित था, जिसका कुशल संयोजन अनुराग श्रीवास्तव द्वारा किया गया। शाम 5 बजे से लेकर देर रात 10 बजे तक चले इस कार्यक्रम ने दर्शकों को अपनी कुर्सियों से बांधे रखा।
कला और संस्कृति को मिला शासकीय प्रोत्साहन
Bhopal कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि विश्वास कैलाश सारंग द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने संगीत की शक्ति और समाज में इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भोपाल हमेशा से ही कला और कलाकारों की जननी रहा है। ‘अनुराग स्वर शाला’ जैसे प्रयास न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी हैं। सारंग ने अनुराग श्रीवास्तव की पहल की सराहना करते हुए इसे कला के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि करार दिया।

इसी क्रम में, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील श्रीवास्तव ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। उन्होंने कलाकारों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। समारोह के दौरान संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए अनुज सक्सेना को प्रतिष्ठित “मोहम्मद रफी सम्मान” से नवाजा गया, जिससे पूरे हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।
यादगार प्रस्तुतियां और मंत्रमुग्ध कर देने वाला गायन
Bhopal समारोह की मुख्य कड़ी कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं, जिन्होंने पुराने और नए गीतों के मिश्रण से एक जादुई वातावरण तैयार किया। उभरती हुई कलाकार कुमारी रुनझुन श्रीवास्तव ने जैसे ही सदाबहार गीत “ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा” की तान छेड़ी, पूरा हॉल पुरानी यादों में खो गया। उनकी आवाज की मिठास ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वहीं, आयोजक अनुराग श्रीवास्तव ने भी मंच संभाला और अपनी भावपूर्ण गायकी से समां बांध दिया। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से स्वर्गीय शुभा श्रीवास्तव को याद किया, जिससे वातावरण भावुक और संगीतमय हो गया। शहर के अन्य चुनिंदा गायकों ने भी अपनी बारी-बारी से प्रस्तुति देकर यह सिद्ध कर दिया कि शास्त्रीय और सुगम संगीत आज भी युवाओं के बीच उतना ही लोकप्रिय है।
पर्दे के पीछे की मेहनत: संगीतकार और टीम वर्क
Bhopal किसी भी सफल संगीत समारोह की रीढ़ उसके साज और संगतकार होते हैं। इस शाम को सुरमयी बनाने में वाद्ययंत्रों की टोली का विशेष योगदान रहा। मंच पर निम्नलिखित कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया:
- तबला: मोहितचंद तंवरिया
- ड्रम्स: अजय कुमार दुबे
- लीड गिटार: दीप चौधरी और संजीव सैनी
- पैड्स: चेतन सोलंकी
- साउंड: अनिल धारे
संगीत का अद्भुत समन्वय केदार सिंह चौहान द्वारा किया गया, जिन्होंने हर धुन को सटीकता और गहराई प्रदान की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रमेश श्रीवास्तव ने अपने विशिष्ट और ऊर्जावान अंदाज में किया। उनकी शानदार शब्दावली और बीच-बीच में सुनाए गए रोचक किस्सों ने दर्शकों का उत्साह अंत तक बनाए रखा। कार्यक्रम के समापन पर शहर के गणमान्य नागरिकों ने इस आयोजन को भोपाल की एक यादगार सांस्कृतिक संध्या बताया।
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