Human Rights: दूषित पानी, लापरवाही से मौत और महिला-बाल मामलों में आयोग की कड़ी कार्रवाई
By: Ishu Kumar
भोपाल: मध्यप्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने मानवाधिकार हनन से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने प्रदेश के सात जिलों में सामने आए कुल 15 प्रकरणों में संज्ञान लेते हुए संबंधित जिलाधीशों, पुलिस अधिकारियों और विभागीय प्रमुखों को नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने इन मामलों में विस्तृत जांच रिपोर्ट और निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
Human Rights: स्वच्छ पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी पर सवाल
राजधानी भोपाल में दूषित पानी की शिकायत को गंभीर मानते हुए आयोग ने नगर निगम आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही शहर के एक क्षेत्र में 16 आंगनवाड़ी केंद्रों में नल कनेक्शन नहीं होने के मामले में भी संज्ञान लिया गया है। आयोग ने इसे बच्चों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा अहम विषय बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। वहीं एक सार्वजनिक पार्क में लंबे समय से कचरा जमा होने से उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिम पर भी नगर निगम से रिपोर्ट तलब की गई है।
Human Rights: मौत के मामलों में लापरवाही पर जवाब तलब
आयोग ने आत्महत्या के मामलों को भी गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखते हुए भोपाल में सामने आए प्रकरणों पर पुलिस आयुक्त और कलेक्टर से जवाब मांगा है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में जंगली जानवर के हमले से ग्रामीण की मौत, खुले पानी के टैंक में गिरने से मासूम बच्चों की मृत्यु और एक बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर भी आयोग ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
महिला, बच्चे और शिक्षा संस्थानों से जुड़े प्रकरण
स्कूलों और छात्रावासों की बदहाल व्यवस्थाओं, महिला एवं बच्चों से जुड़े मामलों और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के प्रकरणों को भी आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है।
पीड़ित परिवारों को सहायता देने के निर्देश
राज्य मानवाधिकार आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित परिवारों को नियमानुसार अधिकतम सहायता प्रदान की जाए। साथ ही, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। आयोग की इस सख्ती को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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