By: Ravindra Sikarwar
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां दो बेटों ने अपने पिता की हत्या करने के लिए जहरीले सांप का इस्तेमाल किया। यह सब लगभग 3 करोड़ रुपये की जीवन बीमा राशि हासिल करने के लिए किया गया। शुरू में इसे सांप के काटने से हुई दुर्घटना माना गया, लेकिन जांच में यह एक सुनियोजित हत्या साबित हुई। परिवार कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था, जिसके कारण बेटों ने इस अमानवीय कदम को उठाया। पुलिस ने दोनों बेटों समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला न केवल परिवारिक रिश्तों की क्रूरता को उजागर करता है, बल्कि बीमा धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर भी सवाल उठाता है।
घटना की शुरुआत और दुर्घटना का नाटक
घटना अक्टूबर 2025 की है, जब पोधत्तूरपेट्टई गांव में रहने वाले 56 वर्षीय ई.पी. गणेशन की मौत हो गई। गणेशन एक सरकारी स्कूल में लैब असिस्टेंट थे। परिवार ने बताया कि घर में घुस आए सांप ने उन्हें काट लिया, जिससे उनकी मौत हुई। पुलिस ने शुरू में इसे अनैच्छिक मौत का मामला दर्ज किया और जांच आगे नहीं बढ़ाई।
लेकिन जब परिवार ने बीमा कंपनियों से दावा किया, तो मामला पलट गया। गणेशन के नाम पर कई हाई-वैल्यू पॉलिसियां ली गई थीं, जिनकी कुल राशि करीब 3 करोड़ रुपये थी। यह राशि परिवार की आय से काफी ज्यादा थी। बीमा कंपनी को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद उत्तर जोन के आईजी असरा गर्ग और तिरुवल्लूर एसपी विवेकानंद शुक्ला ने विशेष जांच दल गठित किया। जांच में पता चला कि मौत कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी।
दो बार की कोशिश और क्रूर योजना
जांच से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गणेशन के बेटे मोहनराज (26) और हरिहरन (27), जो निजी कंपनी में काम करते थे, ने पिता की हत्या की योजना बनाई। वे कर्ज में डूबे थे और बीमा राशि से छुटकारा पाना चाहते थे। साथ ही, सरकारी नौकरी में अनुकंपा आधार पर नियुक्ति की उम्मीद भी थी।
पहली कोशिश मौत से करीब एक हफ्ता पहले हुई। आरोपियों ने कोबरा सांप मंगवाया और सोते समय गणेशन की टांग पर कटवाया। पड़ोसियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया और जान बच गई। लेकिन बेटे हार नहीं माने। दूसरी बार उन्होंने अधिक घातक कrait (कटुविरियन) सांप चुना। 22 अक्टूबर की सुबह घर में सांप लाया गया और गणेशन के गले पर कटवाया गया, जो तुरंत जानलेवा साबित हुआ।
काटने के बाद सांप को घर में ही मार दिया गया, ताकि दुर्घटना का सबूत बन सके। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि परिवार ने अस्पताल ले जाने में जानबूझकर देरी की, जिससे इलाज का मौका ही नहीं मिला। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड्स और पैसे के लेन-देन की जांच से साजिश का पता लगाया। आरोपियों ने सांप की व्यवस्था करने वालों को करीब 1.5 लाख रुपये दिए थे।
गिरफ्तारियां और साजिश में शामिल लोग
पुलिस ने मोहनराज और हरिहरन के अलावा चार सहयोगियों को पकड़ा। इनमें जी. बालाजी (28), बी. प्रशांत (35), एस. दिनकरन (43) और जी. नवीन कुमार (28) शामिल हैं। ये लोग सांप लाने और घटना को अंजाम देने में मदद करने वाले थे। सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
विशेष टीम ने वैज्ञानिक, तकनीकी और फील्ड जांच से पूरी साजिश उजागर की। आरोपियों ने गांव में सांपों की ज्यादा आमद का बहाना बनाया, लेकिन दो बार एक हफ्ते में काटना संदेहास्पद था। पैसे के ट्रांजेक्शन और फोन रिकॉर्ड्स ने केस को मजबूत बनाया।
समाज पर असर और सबक
यह घटना रिश्तों की पवित्रता पर गहरा आघात है। पैसे के लालच में बेटों का अपने पिता को इस तरह मारना समाज को झकझोर कर रख देता है। तमिलनाडु में सांप के काटने से मौतें आम हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में, लेकिन इसे हत्या का हथियार बनाना नया और डरावना ट्रेंड है। बीमा कंपनियों की सतर्कता ने इस बार साजिश को नाकाम बनाया, वरना यह दुर्घटना बनकर रह जाता।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में बीमा दावों की गहन जांच जरूरी है। परिवारों को कर्ज से उबारने के लिए सरकारी योजनाओं का सहारा लेना चाहिए, न कि अपराध का रास्ता। यह मामला आगे की सुनवाई में और खुलासे ला सकता है, लेकिन फिलहाल यह क्रूरता की मिसाल बन चुका है। समाज को ऐसे लालच से बचने और रिश्तों की कीमत समझने की जरूरत है।
