by-Ravindra Sikarwar
लखनऊ के लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में कुल 20 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी। यह बैठक न केवल राज्य के सामाजिक कल्याण, राजस्व सुधार और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने वाली योजनाओं पर केंद्रित रही, बल्कि यह बुजुर्गों और आम नागरिकों के लिए सुगम जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई। कैबिनेट ने वृद्धावस्था पेंशन को घर-घर पहुंचाने और स्टांप ड्यूटी में छूट जैसे जन-उन्मुख फैसलों को प्राथमिकता दी, जो उत्तर प्रदेश सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति को साकार करते हैं। बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने पत्रकारों को विस्तृत जानकारी दी। आइए, इन फैसलों की गहराई से पड़ताल करें।
बैठक का पृष्ठभूमि और प्रमुख थीम:
यह कैबिनेट बैठक हालिया राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय घटनाओं के संदर्भ में आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत दिल्ली के चांदनी चौक में 10 नवंबर को हुए विस्फोट की कड़ी निंदा से हुई, जिसे कैबिनेट ने “कायराना और शांति-विरोधी कृत्य” करार दिया। साथ ही, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की टी20 विश्व कप 2025 में ऐतिहासिक जीत पर कैबिनेट ने हार्दिक बधाई दी, खासकर उत्तर प्रदेश की स्टार खिलाड़ी दीप्ति शर्मा को। बैठक का मुख्य फोकस राज्य के वरिष्ठ नागरिकों, राजस्व विभाग के कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे के विकास पर रहा। कुल 20 प्रस्तावों में से अधिकांश सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार और आर्थिक राहत से जुड़े थे, जो राज्य के 24 करोड़ से अधिक आबादी को लाभ पहुंचाएंगे।
वृद्धावस्था पेंशन: घर बैठे सुविधा, अब 60 साल की उम्र में सरकार खुद संपर्क करेगी
कैबिनेट का सबसे चर्चित फैसला उत्तर प्रदेश वृद्धजन पेंशन योजना में क्रांतिकारी बदलाव लाना रहा। अब 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी पात्र बुजुर्गों को पेंशन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार की योजना है कि जन्म तिथि के आधार पर स्वत: पात्रता की जांच की जाएगी और संबंधित विभाग के अधिकारी लाभार्थी से सीधे फोन पर संपर्क करेंगे। आवश्यक दस्तावेजों की ऑनलाइन या डोरस्टेप वेरिफिकेशन के बाद पेंशन स्वीकृति का पत्र डाक द्वारा घर पहुंचाया जाएगा।
मुख्य विशेषताएं:
- स्वत: पात्रता जांच: आधार कार्ड और जनगणना डेटा के माध्यम से 60 वर्ष पूरे होने पर सिस्टम अलर्ट भेजेगा।
- डोरस्टेप वेरिफिकेशन: योजना अधिकारी 15 दिनों के भीतर डिजिटल सिग्नेचर से स्वीकृति देंगे।
- भुगतान प्रक्रिया: पेंशन सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में हस्तांतरित होगी, जिसमें मासिक 500 रुपये (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए) या 1000 रुपये (शहरी क्षेत्रों के लिए) की राशि शामिल है।
- लाभार्थी संख्या: वर्तमान में राज्य में लगभग 55 लाख वृद्धजन पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, और यह सुविधा 10 लाख नए लाभार्थियों को जोड़ेगी।
- लागत अनुमान: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित, जो डिजिटल इंडिया अभियान से जुड़ा है।
यह फैसला बुजुर्गों की गरिमा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “बुजुर्ग हमारे समाज के आधार स्तंभ हैं; उनकी सेवा ही हमारी प्राथमिकता है।”
स्टांप ड्यूटी में राहत: संपत्ति पंजीकरण सस्ता, आर्थिक बोझ कम
राजस्व विभाग के लिए एक और सौगात के रूप में कैबिनेट ने स्टांप ड्यूटी की दरों में उल्लेखनीय कमी को मंजूरी दी। यह कदम संपत्ति पंजीकरण, भूमि हस्तांतरण और अन्य राजस्व लेन-देन को सुलभ बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक दबाव कम होगा।
राहत के प्रमुख बिंदु:
- दरों में कटौती: आवासीय संपत्तियों पर स्टांप ड्यूटी 7% से घटाकर 5% की गई, जबकि कृषि भूमि के हस्तांतरण पर 6% से 4%।
- महिलाओं के लिए अतिरिक्त छूट: नामांतरण वाली महिलाओं को 1% की अतिरिक्त छूट, जो कुल 6% तक पहुंचेगी।
- ऑनलाइन पंजीकरण: ई-स्टांप और डिजिटल सिग्नेचर से घर बैठे पंजीकरण की सुविधा, जिसमें फीस में 20% की छूट।
- प्रभाव: अनुमानित 5,000 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत, जो राज्य की जीएसडीपी को 0.5% बढ़ावा देगी। पिछले वर्ष 2.5 लाख पंजीकरणों में देरी हुई थी, जो अब कम होगी।
- कार्यान्वयन: 1 दिसंबर 2025 से प्रभावी, राजस्व विभाग के पोर्टल पर तुरंत उपलब्ध।
यह सुधार भूमि बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को गति देगा, साथ ही काले धन पर अंकुश लगाएगा।
अन्य प्रमुख प्रस्ताव: प्रशासनिक और विकासात्मक सुधार
कैबिनेट ने 20 प्रस्तावों में से कई अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जो राज्य के समग्र विकास को लक्षित करते हैं। यहां कुछ प्रमुख हैं:
- लेखपाल सेवा नियमावली (पंचम संशोधन) 2025: राजस्व विभाग के लेखपालों की भर्ती, पदोन्नति और ट्रेनिंग नियमों में संशोधन। अब 2,000 नए पद सृजित होंगे, जो ग्रामीण राजस्व कार्यों को तेज करेंगे। प्रमोशन के लिए 40% वेटेज प्रदर्शन पर आधारित होगा।
- उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारियों के लिए वाहन ऋण: न्यायाधीशों को कार खरीदने के लिए दिए जाने वाले सरकारी ऋण की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 156 अपर निजी सचिवों को निजी सचिव ग्रेड-1 पर पदोन्नत करने का फैसला।
- बुनियादी ढांचा विकास: ग्रेटर नोएडा से बलिया तक 8-लेन एक्सप्रेसवे परियोजना को गति, जिसमें 5,000 करोड़ का निवेश। उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (पीडब्ल्यूडी) नियमावली 1990 में संशोधन से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- सामाजिक और खेल क्षेत्र: महिला क्रिकेट टीम को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार। दिल्ली विस्फोट के शिकार परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा।
- शिक्षा और रोजगार: निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत मुजफ्फरनगर में नया विश्वविद्यालय स्थापना को मंजूरी। रिटायर्ड अग्निवीरों को पुलिस और पीएसी में 20% आरक्षण का विस्तार।
- पर्यावरण और ऊर्जा: ई-बस खरीद नीति 2025 के तहत 500 नई इलेक्ट्रिक बसें, जो प्रदूषण कम करेंगी।
ये प्रस्ताव राज्य के विभिन्न विभागों—राजस्व, न्याय, शिक्षा, परिवहन और ऊर्जा—को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, 20 प्रस्तावों का अनुमानित बजट 12,000 करोड़ रुपये है, जो 2025-26 के वित्तीय वर्ष में लागू होगा।
प्रभाव और भविष्य की दिशा:
ये फैसले उत्तर प्रदेश को एक कल्याणकारी और कुशल राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर हैं। वृद्धावस्था पेंशन और स्टांप ड्यूटी राहत जैसे कदम सीधे लाखों परिवारों को लाभ पहुंचाएंगे, जबकि प्रशासनिक सुधार पारदर्शिता बढ़ाएंगे। विपक्षी दलों ने इनकी सराहना की है, लेकिन कार्यान्वयन पर नजर रखने की बात कही। मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “ये निर्णय जन-केंद्रित हैं, जो ‘एक जिला, एक उत्पाद’ और डिजिटल उत्तर प्रदेश की दृष्टि को सशक्त बनाएंगे।”
