IAS Rinku DuggaIAS Rinku Dugga
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IAS Rinku Dugga;नई दिल्ली: दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने को लेकर 2022 में सुर्खियों में आईं IAS अधिकारी रिंकू दुग्गा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें केंद्र सरकार के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले को रद्द करते हुए उनकी बहाली का रास्ता साफ किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं, ने केंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने बहाली पर लगाई रोक

IAS Rinku Dugga;सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर के आदेश में स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई जारी रहने तक रिंकू दुग्गा की बहाली पर रोक प्रभावी रहेगी। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को उचित नहीं माना गया था।

केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी अदालत में पेश हुईं। अब शीर्ष अदालत इस पूरे मामले में केंद्र सरकार की अपील पर आगे सुनवाई करेगी।

CAT के बाद हाईकोर्ट ने भी दिया था दुग्गा के पक्ष में फैसला

IAS Rinku Dugga;रिंकू दुग्गा ने केंद्र सरकार द्वारा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण यानी CAT के समक्ष चुनौती दी थी। CAT ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए बहाली का आदेश दिया था।

इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल को CAT के फैसले को बरकरार रखा और केंद्र के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के निर्णय को सही नहीं माना। इसी फैसले के खिलाफ केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

2022 में त्यागराज स्टेडियम विवाद से आई थीं चर्चा में

IAS Rinku Dugga;रिंकू दुग्गा और उनके पति संजीव खिरवार, जो खुद भी IAS अधिकारी हैं, वर्ष 2022 में त्यागराज स्टेडियम से जुड़े एक विवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे।

आरोप था कि स्टेडियम में खिलाड़ियों के अभ्यास के समय को प्रभावित करते हुए वहां उनका कुत्ता टहलाया गया। इस घटना से संबंधित तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद काफी विवाद हुआ था।

इसके बाद केंद्र सरकार ने दोनों अधिकारियों का तबादला कर दिया था। रिंकू दुग्गा को अरुणाचल प्रदेश और उनके पति को लद्दाख भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।

हाईकोर्ट ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आधार पर उठाए सवाल

IAS Rinku Dugga;दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में रिंकू दुग्गा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए इस्तेमाल किए गए आधारों की समीक्षा की थी। अदालत के अनुसार, त्यागराज स्टेडियम से जुड़े मामले में उनके खिलाफ पहले ही अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी थी और उन्हें मामूली दंड दिया गया था।

इसके अलावा बिना अनुमति अनुपस्थित रहने से जुड़े मामले का भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश में उल्लेख किया गया था।

हाईकोर्ट ने माना कि समीक्षा समिति ने सेवा रिकॉर्ड से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। अदालत ने विशेष रूप से उनकी APAR यानी Annual Performance Appraisal Reports में किसी प्रतिकूल टिप्पणी के अभाव और पिछले प्रदर्शन की अच्छी रेटिंग का उल्लेख किया था।

प्रमोशन के लिए भी विचार किया जा रहा था

IAS Rinku Dugga;हाईकोर्ट के फैसले में यह भी सामने आया कि रिंकू दुग्गा के सेवा रिकॉर्ड में उनके प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक पहलू मौजूद थे। यहां तक कि उन्हें पदोन्नति के लिए भी विचाराधीन बताया गया था।

अदालत ने कहा था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति का उद्देश्य ऐसे अधिकारी को सेवा से हटाना है, जिसे प्रशासन की नजर में आगे सेवा के लिए अनुपयुक्त या उपयोगी न माना जाए। हाईकोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर दुग्गा के मामले में इस सिद्धांत को लागू करने का पर्याप्त आधार नहीं दिखता।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर

IAS Rinku Dugga;फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते रिंकू दुग्गा की बहाली का मामला आगे की सुनवाई तक अटका रहेगा। शीर्ष अदालत अब केंद्र सरकार की अपील और हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई करेगी।

13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगी रोक आगे जारी रहेगी या मामले में कोई नया निर्देश दिया जाएगा।

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