US Military ExerciseUS Military Exercise
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US Military Exercise:भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने वाला ‘युद्ध अभ्यास 2026’ 15 सितंबर से शुरू हो गया है। 28 सितंबर तक चलने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में दोनों देशों के करीब 700 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। इस बार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अभ्यास को एक ही समय में दो अलग-अलग भौगोलिक और ऑपरेशनल परिस्थितियों में आयोजित किया जा रहा है।

अभ्यास का एक हिस्सा राजस्थान के बीकानेर के पास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में और दूसरा उत्तराखंड के औली क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। यानी सैनिकों को एक ओर रेगिस्तानी युद्धक्षेत्र की चुनौती का सामना करना है, तो दूसरी ओर ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में ऑपरेशन की तैयारी करनी है।

राजस्थान में Desert Warfare पर जोर

US Military Exercise:महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय और अमेरिकी सैनिक रेगिस्तानी परिस्थितियों में संयुक्त अभियान की ट्रेनिंग कर रहे हैं। यहां Long-Range Fire, Precision Strike, Tactical Manoeuvre और Joint Operations जैसी क्षमताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस चरण का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच युद्ध के दौरान तालमेल, फायर सपोर्ट और तेजी से ऑपरेशनल निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर करना है।

औली में High-Altitude Warfare की ट्रेनिंग

US Military Exercise:अभ्यास का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तराखंड के औली में हो रहा है। यहां सैनिकों को कठिन पहाड़ी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभियान चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

इस दौरान High-Altitude Warfare, Air Mobility और Logistics जैसी क्षमताओं का अभ्यास किया जा रहा है। औली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित है, इसलिए इस क्षेत्र में होने वाला प्रशिक्षण रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

करीब 700 सैनिक ले रहे हैं हिस्सा

US Military Exercise:इस बार अभ्यास में भारत और अमेरिका की ओर से लगभग 350-350 सैनिक शामिल हैं। दोनों सेनाएं केवल पारंपरिक युद्धक तकनीकों का अभ्यास नहीं कर रही हैं, बल्कि आधुनिक युद्ध में तेजी से महत्वपूर्ण हो रही तकनीकों को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।

Counter-Drone Warfare बना अहम हिस्सा

US Military Exercise:‘युद्ध अभ्यास 2026’ में Counter-Drone Warfare पर खास जोर दिया गया है। पहली बार अमेरिकी Mobile Low, Slow, Small Unmanned Aircraft Integrated Defeat System (MLIDS) को भारत में इस अभ्यास के दौरान शामिल किया जा रहा है।

इसके जरिए ड्रोन से पैदा होने वाले खतरे को पहचानने, उसकी निगरानी करने और उसे निष्क्रिय करने की क्षमताओं का परीक्षण एवं अभ्यास किया जाएगा। आधुनिक संघर्षों में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए यह प्रशिक्षण दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

Command से लेकर Live-Fire तक संयुक्त अभ्यास

US Military Exercise:इस सैन्य अभ्यास में कई स्तरों पर प्रशिक्षण शामिल है। इनमें Command Post Exercise, Field Training Exercise और Combined Live-Fire Demonstration प्रमुख हैं।

इन गतिविधियों का लक्ष्य केवल सैनिकों की फायरिंग क्षमता बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए दोनों सेनाओं के बीच Command and Control, Communication, Fire Support, Logistics और Operational Procedures में बेहतर तालमेल विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

Modern Warfare की बदलती जरूरतों पर फोकस

US Military Exercise:दोनों देशों की सेनाएं अभ्यास के दौरान अपने सैन्य अनुभव और आधुनिक तकनीकों से जुड़े अनुभव भी साझा कर रही हैं। हाल के संघर्षों में Drones, Counter-Drone Systems, Precision Fire और Multi-Domain Operations का महत्व तेजी से बढ़ा है।

इसी बदलते युद्ध परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए इस बार के अभ्यास में पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ नई तकनीकी क्षमताओं को भी प्रमुखता दी गई है।

अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर की भी भागीदारी

US Military Exercise:भारत में अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर भी अभ्यास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने वाले हैं। उनकी भागीदारी को दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और सैन्य सहयोग के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

2004 से जारी है ‘युद्ध अभ्यास’

US Military Exercise:भारत और अमेरिका के बीच इस संयुक्त सैन्य अभ्यास की शुरुआत 2004 में हुई थी। तब से यह दोनों देशों के बीच प्रमुख द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों में शामिल रहा है और इसे बारी-बारी से भारत तथा अमेरिका में आयोजित किया जाता रहा है।

हालांकि, 2026 का संस्करण कई मायनों में अलग है। पहली बार एक ही अभ्यास के तहत रेगिस्तानी क्षेत्र और हाई-ऑल्टिट्यूड पहाड़ी क्षेत्र दोनों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है।

क्यों खास है ‘युद्ध अभ्यास 2026’?

US Military Exercise:इस अभ्यास का सबसे बड़ा संदेश दोनों सेनाओं की Jointness और Interoperability को मजबूत करना है। राजस्थान में रेगिस्तानी युद्ध की परिस्थितियों और उत्तराखंड में ऊंचाई वाले क्षेत्र की चुनौतियों को एक साथ शामिल करके सैनिकों को अलग-अलग ऑपरेशनल वातावरण में काम करने का अनुभव मिल रहा है।

इसके साथ ही Counter-Drone Technology और Precision Warfare जैसे आधुनिक पहलुओं पर जोर यह दिखाता है कि भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग अब पारंपरिक युद्ध प्रशिक्षण से आगे बढ़कर Next-Generation Warfare Capabilities पर भी केंद्रित हो रहा है।

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