रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर
Supaul : बिहार के कोसी क्षेत्र में रेल सुविधाओं के विस्तार की मांग को लेकर जन-आक्रोश अब सड़कों पर दिखने लगा है। सोमवार को सुपौल रेलवे स्टेशन परिसर में स्थानीय नागरिकों, विभिन्न कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान रेलवे प्रशासन के उदासीन रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और क्षेत्र की लंबे समय से लंबित पड़ी बुनियादी रेल सुविधाओं को तत्काल बहाल करने की मांग दोहराई गई।
Supaul हाट बाजरे का विस्तार और गढ़ बरूआरी में ठहराव की मुख्य मांग
बिहार युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव लक्ष्मण कुमार झा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के नाम एक ज्ञापन स्टेशन अधीक्षक को सौंपा गया। आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से दो मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं:
हाट बाजरे एक्सप्रेस का ओरिजिनेशन बदलना: पहली प्रमुख मांग यह है कि हाट बाजरे एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन सहरसा के स्थान पर सुपौल रेलवे स्टेशन से शुरू किया जाए। वक्ताओं का कहना है कि सुपौल अब एक प्रमुख जंक्शन के रूप में उभर चुका है और यहां से रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में इस ट्रेन की शुरुआत सुपौल से होने पर जिले के विकास को नई रफ़्तार मिलेगी।
सहरसा-जोगबनी एक्सप्रेस का स्टॉपेज: दूसरी मांग सहरसा-जोगबनी एक्सप्रेस का गढ़ बरूआरी रेलवे स्टेशन पर नियमित ठहराव (स्टॉपेज) देने की है। इस रूट पर स्टॉपेज न होने से स्थानीय व्यापारियों, छात्र-छात्राओं और नौकरीपेशा वर्ग को सफर करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
Supaul कोसी क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप और जनभावनाएं
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रेल सुविधाओं के मामले में सुपौल जिला लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रहा है। कोसी संभाग के लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी बार-बार संघर्ष करना पड़ता है। उनका कहना है कि सुपौल और गढ़ बरूआरी क्षेत्र के लाखों लोगों की भावनाएं और जरूरतें इन मांगों से जुड़ी हैं, इसलिए रेलवे को क्षेत्र में संतुलन बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
Supaul आंदोलन तेज करने की रेलवे प्रशासन को खुली चेतावनी
हाथों में बैनर और तख्तियां लिए लोगों का यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन उनके तेवर बेहद कड़े थे। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में रेलवे प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इन दो सूत्री मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में चक्काजाम और उग्र जनआंदोलन जैसी रणनीतियां अपनाई जाएंगी। जनता के अधिकारों की यह लड़ाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

