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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : जिले के मंडल कारा और बीरपुर स्थित अनुमंडलीय कारा में बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य तथा उनके कानूनी अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। यह पहल राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BLSA) के निर्देशानुसार आयोजित की गई, जिसका मुख्य लक्ष्य मानसिक रूप से अस्वस्थ अथवा दिव्यांग बंदियों को निशुल्क कानूनी मदद और उचित चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराना था।

यह आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष (DLSA) श्री राजेश कुमार बच्चन के दिशानिर्देशों और DLSA सचिव श्री अमित गौरव की देखरेख में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के माध्यम से जेल में बंद व्यक्तियों को उनके अधिकारों से अवगत कराया गया और स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

मानसिक स्वास्थ्य की महत्ता और मानवीय दृष्टिकोण पर बल

Supaul कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की भांति ही अत्यंत महत्वपूर्ण है। तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं की समय पर पहचान कर पीड़ित व्यक्ति को परामर्श और डॉक्टरी देखभाल उपलब्ध कराना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के प्रति समाज और प्रशासन को संवेदनशील तथा मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि उनके साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो।

निशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी

Supaul सत्र के दौरान बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार की भूमिका और निशुल्क कानूनी सहायता पाने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय से वंचित रहने वाले बंदियों को नियमानुसार मुफ्त कानूनी सलाह और वकील की सुविधा दी जाती है। जेल प्रशासन और कानूनी टीम का मुख्य उद्देश्य ऐसे बंदियों की पहचान करना है जिन्हें तत्काल कानूनी या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता की आवश्यकता है।

न्यायिक अधिकारियों और चिकित्सकों की सक्रिय सहभागिता

Supaul इस जागरूकता अभियान और परामर्श शिविर में न्यायिक व स्वास्थ्य जगत के कई प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता संजय कुमार, सहायक अधिवक्ता सौरभ मोहन ठाकुर, सदर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुमार और जेल डॉक्टर एम. के. मिलन मौजूद रहे। इनके अलावा स्वास्थ्यकर्मी, कारापाल शंभू कुमार दास और पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) ने भी अपनी भूमिका निभाई। इस समन्वित प्रयास ने बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और मानवीय गरिमा को बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश दिया।

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